गुरु की राशि में शुक्र की वक्री चाल, किन राशियों के जीवन में लाएगी भूचाल!

प्रेम एवं ऐश्वर्य के ग्रह शुक्र देव को वैदिक ज्योतिष में लाभकारी ग्रह माना जाता है। इनकी चाल, दशा, राशि या स्थिति में होने वाले किसी भी परिवर्तन का असर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन पर पड़ता है। बता दें कि शुक्र देव तक़रीबन 28 दिनों तक एक राशि में रहते हैं और इस दौरान यह अपनी चाल और स्थिति में भी बदलाव करते हैं। अब यह जल्द ही गुरु ग्रह की राशि मीन में वक्री होने जा रहे हैं जिसका असर देश-दुनिया सहित सभी 12 राशियों पर दिखाई देगा। एस्ट्रोसेज एआई का यह लेख आपको “शुक्र मीन राशि में वक्री” से जुड़ीं समस्त जानकारी प्रदान करेगा जैसे कि तिथि, समय आदि। साथ ही, आपको अवगत करवाएंगे कि कुंडली में शुक्र महाराज के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने के लिए आप किन उपायों को कर सकते हैं, इसलिए इस ब्लॉग को अंत तक पढ़ना जारी रखें। 

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बता दें कि ज्योतिष के साथ-साथ मनुष्य जीवन में भी शुक्र ग्रह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इसलिए प्रेम जीवन की बात करते समय कुंडली में इनकी स्थिति सबसे पहले देखी जाती है। विद्वान ज्योतिषियों का मत है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत स्थिति में होते हैं, तो ऐसे जातकों को अपने जीवन में हर तरह का सुख, वैवाहिक सुख, विलासिता और प्रसिद्धि की प्राप्ति होती है। आज के इस विशेष ब्लॉग के माध्यम से हम जानेंगे कि शुक्र मीन राशि में वक्री होकर संसार को कैसे प्रभावित करेंगे। आइए सबसे पहले जानते हैं शुक्र वक्री के समय और तिथि के बारे में। s

शुक्र मीन राशि में वक्री: तिथि और समय

ऐश्वर्य, भौतिक सुख-सुविधाओं और विलासिता के प्रमुख ग्रह शुक्र देव गुरु ग्रह की राशि मीन में 02 मार्च 2025 की सुबह 05 बजकर 12 मिनट पर वक्री हो जाएंगे। शायद ही आप जानते होंगे कि मीन राशि शुक्र ग्रह की उच्च राशि है जिसमें इनकी स्थिति को शुभ माना जाता है। ऐसे में, शुक्र का मीन राशि में वक्री होना कुछ राशियों के लिए सकारात्मक और कुछ के लिए नकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। मीन राशि में रहते हुए शुक्र ग्रह 13 अप्रैल 2025 को वक्री अवस्था से बाहर आते हुए पुनः मार्गी हो जाएंगे। हालांकि, इस दौरान शुक्र देव शुभ योग भी बनाएंगे, जिनके बारे में आगे विस्तार से बात करेंगे, लेकिन आपको बताते हैं कि आख़िर किसे कहते हैं ग्रह की वक्री अवस्था।

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किसे कहते हैं ग्रह की वक्री अवस्था?

एस्ट्रोसेज एआई अपने पिछले लेखों में बताता आया है कि सूर्य को नवग्रहों के राजा कहा जाता है क्योंकि सूर्य देव के अलावा बाकी सब ग्रह समय-समय पर अपनी चाल और स्थिति में बदलाव करते हैं जिसे अस्त, मार्गी, वक्री और उदय कहा जाता है। लेकिन यहां हम बात कर रहे हैं ग्रहों की वक्री अवस्था के बारे में। 

ज्योतिष शास्त्र में वक्री चाल के संबंध में कहा गया है कि जब कोई ग्रह अपने परिक्रमा मार्ग पर पीछे की तरफ यानी कि उल्टा चलता हुआ प्रतीत होता है, तो इस घटना को ग्रह का वक्री होना कहते हैं। मान्यता है कि कुंडली में स्थित वक्री ग्रह के अशुभ होने पर जातक को पहले की तुलना में अधिक अशुभ परिणाम देखने को मिलते हैं। विज्ञान की बात करें, तो ग्रहों के वक्री अवस्था को विज्ञान नहीं मानता है।

शुक्र-बुध की युति करेगी एक बेहद शुभ राजयोग का निर्माण 

जैसे कि हम जानते हैं कि शुक्र महाराज 28 जनवरी 2025 से अपनी उच्च राशि मीन में विराजमान हैं। इसी राशि में रहते हुए शुक्र ग्रह वक्री होने जा रहे हैं और यह अपनी वक्री अवस्था में भी शुभ योग का निर्माण करेंगे। बुध देव 27 फरवरी 2025 की रात 11 बजकर 28 मिनट पर मीन राशि में गोचर कर जाएंगे। 

ऐसे में, शुक्र और बुध ग्रह की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण होगा जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। इस राजयोग से कुछ जातकों को कार्यों में सफलता और धन-समृद्धि की प्राप्ति होगी। साथ ही, आर्थिक समस्याएं भी समाप्त होंगी। 

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शुक्र का ज्योतिषीय महत्व 

  • प्रेम के कारक शुक्र ग्रह मनुष्य जीवन को संपत्ति, सुख-संपदा, वाहन, ऐश्वर्य, समृद्धि आदि प्रदान करते हैं। 
  • जिन जातकों की कुंडली में शुक्र देव मज़बूत अवस्था में होते हैं, उनको जीवन में प्रेम और सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है। 
  • आपका व्यक्तित्व आकर्षक होगा जो दूसरों को अपनी तरफ आकर्षित करेगा। इन जातकों को जीवन में कभी भी सुख-सुविधा की कमी नहीं होती है। यह आपको अमीर और धनवान बनाते हैं। 
  • अगर किसी की कुंडली में शुक्र देव कमजोर और दुर्बल होते हैं, तो ऐसे इंसान को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 
  • आपका प्रेम जीवन निराशा से भर सकता है और साथ ही, आपको यौन से जुड़ी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। 
  • शुक्र देव की कृपा से जीवन में प्रेम और सुख का आशीर्वाद मिलता है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी कुंडली में शुक्र ग्रह को मज़बूत बनाए रखना चाहिए।

आइए अब नज़र डालते हैं कुंडली में कमज़ोर शुक्र ग्रह के लक्षणों पर। 

कुंडली में कमज़ोर शुक्र के लक्षण

  • ज्योतिष के अनुसार, व्यक्ति की कुंडली में शुक्र दुर्बल होने पर घर में गरीबी दस्तक देती है।
  • शुक्र के कमज़ोर अवस्था में होने से जातकों के जीवन में आर्थिक समस्याएं बढ़ सकती है। ऐसे में, आपको धन से जुड़ी परेशानियां रह सकती हैं।
  • कुंडली में शुक्र के अशुभ होने पर व्यक्ति को हर काम में असफलता प्राप्त होती है। साथ ही, आपको कामयाबी के मार्ग में परेशानियों से दो-चार होना पड़ सकता है। 
  • ऐसे लोगों को वैवाहिक जीवन में समस्याओं और तकलीफों से गुजरना पड़ता है। 

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शुक्र मीन राशि में वक्री के दौरान अपनाएं ये उपाय 

  • कुंडली में शुक्र ग्रह को बलवान करने के लिए दूध, दही और खीर आदि का दान करें। 
  • शुक्र देव को मज़बूत बनाने के लिए भगवान कृष्ण को चांदी की बासुरी अर्पित करें। 
  • घर में शुक्र यंत्र की स्थापना करने से सकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होती है। 
  • शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करें और उनके लिए व्रत करें। 
  • शुक्रवार के दिन सफेद रंग के वस्त्र ज्यादा से ज्यादा धारण करें। 
  • यदि शुक्र देव कमजोर होते हैं, तो ऐसे जातक को कभी भी फटे-पुराने कपड़े नहीं धारण करने चाहिए, अन्यथा आपको नकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। 
  • ऐसे लोगों को केमिकल वाले परफ्यूम की जगह प्राकृतिक महक वाले इत्र का उपयोग दैनिक जीवन में करना चाहिए। 

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शुक्र मीन राशि में वक्री: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय 

मेष राशि

मेष राशि के दूसरे और सातवें भाव के स्‍वामी शुक्र हैं और अब वह आपके बारहवें भाव में…(विस्तार से पढ़ें) 

वृषभ राशि

वृषभ राशि के पहले और छठे भाव के स्‍वामी शुक्र ग्रह हैं और अब वह इस राशि के ग्‍यारहवें…(विस्तार से पढ़ें)

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के पांचवे और बारहवें भाव के स्‍वामी शुक्र ग्रह हैं और अब वह…(विस्तार से पढ़ें)

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों के लिए शुक्र उनके चौथे और ग्‍यारहवें भाव के स्‍वामी हैं और अब शुक्र…(विस्तार से पढ़ें)

सिंह राशि

सिंह राशि के तीसरे और दसवें भाव के स्‍वामी शुक्र ग्रह हैं और अब वक्री होने पर वह इस…(विस्तार से पढ़ें) 

कन्या राशि

कन्‍या राशि के दूसरे और नौवें भाव का स्‍वामी शुक्र ग्रह है और अब वह इस राशि के सातवें…(विस्तार से पढ़ें)

तुला राशि

तुला राशि के पहले और बारहवें भाव के स्‍वामी शुक्र ग्रह हैं और अब वह आपके छठे भाव…(विस्तार से पढ़ें) 

वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि के सातवें और बारहवें भाव के स्‍वामी शुक्र ग्रह हैं और अब वह इस राशि…(विस्तार से पढ़ें)

धनु राशि 

धनु राशि के छठे और ग्यारहवें भाव के स्‍वामी शुक्र ग्रह हैं और अब वह आपके चौथे भाव…(विस्तार से पढ़ें)

मकर राशि

मकर राशि के लिए शुक्र पांचवे और दसवें भाव के स्‍वामी हैं और अब वह आपके तीसरे भाव…(विस्तार से पढ़ें)

कुंभ राशि

कुंभ राशि के चौथे और नौवें भाव के स्‍वामी शुक्र ग्रह हैं और अब शुक्र आपके दूसरे भाव में…(विस्तार से पढ़ें)

मीन राशि

मीन राशि के तीसरे और आठवें भाव के स्‍वामी शुक्र देव हैं और अब वह आपके पहले भाव में…(विस्तार से पढ़ें)

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुक्र मीन राशि में वक्री कब होंगे?

शुक्र देव 02 मार्च 2025 को मीन राशि में वक्री हो जाएंगे।

मीन राशि का स्वामी कौन है?

राशि चक्र की बारहवीं राशि मीन के स्वामी देव गुरु ग्रह हैं। 

शुक्र कितने समय तक एक राशि में रहते हैं?

प्रेम के कारक ग्रह शुक्र 25 से 28 दिन तक एक राशि में रहते हैं।

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