मीन राशि में उदित होकर शनि इन राशियों के करेंगे वारे-न्यारे!

मीन राशि में उदित होकर शनि इन राशियों के करेंगे वारे-न्यारे!

शनि का मीन राशि में उदय: वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को न्याय के देवता या न्यायाधीश का पद प्राप्त है क्योंकि यह मनुष्य को उनके कर्मों के अनुसार अच्छे-बुरे फल प्रदान करते हैं। हालांकि, यह एक शुष्क और ठंडा ग्रह है जिन्हें नवग्रहों में सबसे मंद और धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है। इनका संबंध अधिकतर पुरानी चीज़ों से जोड़ा जाता है। बता दें कि शनि महाराज को क्रूर ग्रह माना गया है जो किसी इंसान के जीवन में समस्याओं और परेशानियों को बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। इसके विपरीत, यदि किसी जातक की कुंडली में इनकी स्थिति मज़बूत होती है, तो यह आपको जीवन में हर तरह का सुख प्रदान करते हैं। शायद ही आप जानते होंगे कि शनि ग्रह एकमात्र ऐसे ग्रह हैं जो किसी इंसान को राजा से रंक और रंक से राजा बनाने की क्षमता रखते हैं। अब यह जल्द ही अपनी स्थिति में बदलाव करते हुए मीन राशि में उदित होने जा रहे हैं। 

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इसी क्रम में, एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको “शनि का मीन राशि में उदय” के बारे में समस्त जानकारी प्रदान करेगा जैसे कि तिथि और समय आदि। अब एक लंबे समय तक शनि अस्त रहने के बाद पुनः उदित होने जा रहे हैं और ऐसे में, यह देखना होगा कि राशि चक्र की किन राशियों को शनि की उदित अवस्था शुभ परिणाम देगी? किन जातकों को करियर में उतार-चढ़ाव का सामना करना होगा या फिर बनेंगे आपके रुके हुए काम? आर्थिक जीवन, प्रेम वैवाहिक और पारिवारिक जीवन के लिए कैसा रहेगा शनि का मीन राशि में उदय? इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिए इस लेख को पढ़ना जारी रखें जिसे हमारे अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा ग्रहों-नक्षत्रों की चाल, दशा और स्थिति के आधार पर तैयार किया गया है। तो आइए बिना रुके आगे बढ़ते हैं और सबसे पहले जान लेते हैं शनि उदित का समय। 

शनि का मीन राशि में उदय: तिथि और समय

जैसे कि हम सभी जानते हैं कि शनि ग्रह से मिलने वाले परिणामों में देर अवश्य हो सकती है, लेकिन यह देर-सवेर अवश्य फल देते हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह समस्याओं, देरी, परंपराओं, प्रतिबंध, दुख, दुर्भाग्य और आयु का प्रतिनिधित्व करते हैं जो अब लगभग एक महीने के बाद 31 मार्च 2025 की रात 12 बजकर 43 मिनट पर मीन राशि में उदित होने जा रहे हैं। बता दें कि शनि देव 22 फरवरी 2025 को मीन राशि में अस्त हो गए थे। 

हालांकि, शनि ग्रह के उदित होने से कुछ राशियों को सकारात्मक और कुछ राशियों को नकारात्मक परिणाम मिलने शुरू हो जाएंगे। कौन सी हैं वह राशियां? इस बारे में हम विस्तार से बात करेंगे, लेकिन उससे पहले जान लेते हैं उदित अवस्था के बारे में। 

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किसे कहते हैं ग्रह का उदय होना?

ज्योतिष की दुनिया में ग्रहों की चाल या दशा में होने वाले बदलाव को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी क्रम में, ग्रहों का अस्त होना और उदित होना दोनों ही मनुष्य जीवन को प्रभावित करने का सामर्थ्य रखते हैं। हालांकि, ग्रह का उदित होना किसे कहते हैं, इस बात को समझने के लिए आपको अस्त अवस्था के बारे में जानना होगा। बता दें कि जब कोई ग्रह परिक्रमा पथ पर चलते हुए सूर्य के बेहद करीब चला जाता है, तो सूर्य के तेज़ प्रभाव से अस्त हो जाता है। ऐसे में, वह अपनी सभी शक्तियां खोकर कमज़ोर हो जाता है। 

ठीक इसी प्रकार, जब अस्त अवस्था में ग्रह चलता हुआ पुनः सूर्य देव से एक निश्चित दूरी पर आ जाता है, तो इसे ग्रह का उदय होना कहते हैं। इसके साथ ही, जैसे ही ग्रह उदित होता है, वह अपनी सारी शक्तियां दोबारा हासिल कर लेता है और एक बार फिर से जातक को अपनी पूरी क्षमता के साथ परिणाम देने लगता है। 

चलिए अब नज़र डालते हैं और जानते हैं शनि ग्रह का महत्व। 

वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह 

  • शनि ग्रह को वैदिक ज्योतिष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रमुख ग्रह का स्थान प्राप्त है। यह व्यक्ति को उनकी सीमाओं, प्रतिबद्धता और जिम्मेदारियों की याद दिलाते हैं। 
  • मनुष्य जीवन में शनि महाराज दुख, आयु, पीड़ा, रोग, तकनीकी, विज्ञान आदि के कारक ग्रह माने जाते हैं। 
  • राशि चक्र में मकर और कुंभ राशि को शनि देव की राशि माना गया है। वहीं, तुला इनकी उच्च राशि है जबकि मेष में शनि देव नीच अवस्था में होते हैं। 
  • मंद गति से चलने की वजह से शनि ग्रह एक राशि में लगभग ढाई साल तक रहते हैं और इसको ही शनि की ढैया कहा जाता है। 
  • वहीं, शनि ग्रह की दशा साढ़े सात साल तक चलती है और इसे ही शनि की साढ़े साती कहते हैं। 

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मनुष्य जीवन पर शनि ग्रह का प्रभाव

  • ऐसे जातक जिनकी कुंडली में शनि ग्रह मजबूत स्थिति में होते हैं, उन्हें अपने जीवन में तमाम तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। 
  • मज़बूत शनि वाले लोग इरादों के पक्के होते हैं और कार्यों को करने से पीछे नहीं हटते हैं। साथ ही, यह न्याय प्रिय भी होते हैं। 
  • जिन लोगों की कुंडली में शनि दुर्बल अवस्था में उपस्थित होते है, उन्हें अपने जीवन में अनेक प्रकार के दुखों और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 
  • इनके जीवन में अप्रिय घटनाएं होने के योग बनने लगते हैं जिसके चलते आपके जेल जाने की नौबत आ सकती है या फिर आप दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। 

हालांकि, ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को मज़बूत करने और इनके नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए अनेक उपाय बताए गए हैं जिनके बारे में आगे बात करेंगे। 

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शनि का मीन राशि में उदय के दौरान करें ये उपाय 

  • शनिवार के दिन शनि स्तोत्र का सात बार पाठ करें।
  • शनि देव का आशीर्वाद पाने के लिए आप मछली, चिड़िया और पशुओं को दाना, पानी और चारा आदि खिलाएं। ऐसा करना फायदेमंद साबित होता है।
  • कुंडली में कुपित शनि के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए भगवान हनुमान की पूजा करें। साथ ही, प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। 
  • शनिवार को संध्या के समय पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं।
  • साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान मांस-मदिरा के सेवन से बचें। 

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शनि का मीन राशि में उदय: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय 

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए शनि देव आपके दसवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं जो…(विस्तार से पढ़ें) 

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में नौवें भाव और दसवें भाव के स्वामी हैं। ऐसे…(विस्तार से पढ़ें)

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि महाराज आपके आठवें और नौवें भाव के स्वामी हैं जो…(विस्तार से पढ़ें)

कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपके सातवें भाव और आठवें भाव के स्वामी हैं। अब यह…(विस्तार से पढ़ें)

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए शनि महाराज आपकी कुंडली में छठे भाव और सातवें भाव…(विस्तार से पढ़ें) 

कन्या राशि

कन्या राशि वालों की कुंडली में शनि देव आपके पांचवें भाव और छठे भाव के स्वामी हैं जो…(विस्तार से पढ़ें)

तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए शनि ग्रह आपके चौथे और पांचवें भाव के अधिपति देव हैं। इस…(विस्तार से पढ़ें) 

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि देव आपके तीसरे भाव और चौथे भाव के स्वामी हैं जो अब…(विस्तार से पढ़ें) 

धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए शनि ग्रह आपके दूसरे भाव और तीसरे भाव के स्वामी हैं। अब…(विस्तार से पढ़ें)

मकर राशि

मकर राशि वालों की कुंडली में शनि ग्रह आपके लग्न भाव और दूसरे भाव के स्वामी हैं जो…(विस्तार से पढ़ें)

कुंभ राशि

कुंभ राशि वालों के लिए शनि देव आपकी कुंडली में लग्न भाव और बारहवें भाव के स्वामी हैं। अब…(विस्तार से पढ़ें)

मीन राशि

मीन राशि के जातकों की कुंडली में शनि देव आपके ग्यारहवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं। अब…(विस्तार से पढ़ें)

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. शनि का उदय कब होगा?

मीन राशि में शनि देव 31 मार्च 2025 को उदित होंगे। 

2. मीन राशि में शनि का गोचर कब हुआ था?

शनि ग्रह 29 मार्च 2025 को मीन राशि में गोचर कर गए थे।

2. मीन राशि किसकी है?

राशि चक्र की बारहवीं राशि मीन के स्वामी गुरु ग्रह हैं।