होलिका दहन पर अग्नि में अर्पित करें ये चीज़ें, जीवन से नकारात्मकता का हो जाएगा अंत!

होलिका दहन पर अग्नि में अर्पित करें ये चीज़ें, जीवन से नकारात्मकता का हो जाएगा अंत!

होलिका दहन 2025 एक हिंदू त्योहार है जो एकता, परंपराओं और आनंद का भव्य उत्सव है। हिंदू धर्म में दिवाली के बाद मनाया जाने वाला दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पर्व है होली जिसे क्षमा और बुराई पर अच्छाई की जीत प्रतीक माना गया है। पंचांग के अनुसार, होलिका दहन को प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है और अगले दिन रंगों की होली पूरे उत्साह से मनाई जाती है। होलिका दहन के दिन जलने वाली अग्नि से आपके जीवन और वातावरण में फैली नकारात्मक शक्तियों का नाश हो जाता है। यह त्योहार पर्यावरण में सकारात्मकता का संचार करता है। सिर्फ इतना ही नहीं, होली के पहले दिन यानी कि होलिका दहन से ही फिजाओं में गुलाल उड़ने की शुरुआत हो जाती है। 

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होलिका दहन 2025 का यह विशेष ब्लॉग एस्ट्रोसेज एआई अपने पाठकों के लिए लेकर आया है जिसके माध्यम से हम आपको होलिका दहन की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में बताएंगे। साथ ही, होलिका दहन पर आप राशि अनुसार अग्नि में किन वस्तुओं को डाल करके नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं, इससे भी आपको अवगत करवाएंगे। तो आइए बिना रुके शुरुआत करते हैं इस ब्लॉग की और सबसे पहले जानते हैं होलिका दहन 2025 की तिथि और समय। 

होलिका दहन 2025: तिथि और समय

हिंदू पंचांग की बात करें तो, होली पर्व का आरंभ फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से होता है और इस पर्व के पहले दिन होलिका दहन किया जाता है। इसके दूसरे दिन रंग वाली होली खेलने की परंपरा है। बता दें कि होलिका की अग्नि बुराई पर अच्छाई और भक्ति की शक्ति को दर्शाती है। इस साल कब मनाया जाएगा होलिका दहन का पर्व और क्या रहेगा शुभ मुहूर्त? चलिए जानते हैं। 

होलिका दहन की तिथि: 13 मार्च 2025, गुरुवार

होलिका दहन शुभ मुहूर्त :रात 11 बजकर 30 मिनट से रात 12 बजकर 24 मिनट तक

अवधि: 0 घंटे 53 मिनट

भद्रा पुँछा का समय: शाम 07 बजकर 13 मिनट से रात 08 बजकर 30 मिनट तक

भद्रा मुखा का समय: रात 08 बजकर 30 मिनट से रात 10 बजकर 38 मिनट तक

पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 13 मार्च 2025 की सुबह 10 बजकर 38 मिनट से, 

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 14 मार्च 2025 की दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक। 

होलिका दहन का अचूक उपाय

एस्ट्रोसेज एआई के अनुभवी एवं विद्वान ज्योतिषी गोपाल अ होली पर समस्याओं के निवारण के लिए एक सरल एवं अचूक उपाय प्रदान कर रहे हैं। यदि आप समस्याओं से ग्रस्त और परेशानियों से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो होली पर यह प्रयोग जरूर करें क्योंकि इससे आपको समस्याओं से राहत मिलेगी जो कि इस प्रकार हैं: 

“जिस दिन होली की पूजा होती है, उस दिन 5 नारियल श्रीफल और पांच खारक छुआरे लेकर एक काले कपड़े में बांध ले और अपने इष्ट देव से प्रार्थना करें। शाम को जब भी होलिका का दहन हो, तब वहां पर नारियल और खारक छुआरे से बंधी हुई पोटली को लेकर 11 या 21 बार परिक्रमा करें। इस बीच अपने मन में प्रभु का ध्यान करते हुए समस्याओं को भी मन ही मन में बोलते रहें और परिक्रमा पूरी करें। परिक्रमा पूर्ण होने के बाद उसे पोटली को होलिका दहन के बाद जलती हुई होली में डाल दें और प्रणाम कर के घर वापस आ जाएं।”

धार्मिक दृष्टि से होलिका दहन का महत्व

होलिका दहन युगों से युगों से लोगों को अधर्म पर धर्म, अन्याय पर न्याय और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देती आई है। नारद पुराण और भविष्य पुराण जैसे प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में   होली पर्व का वर्णन किया गया है। होली 2025 के महत्व का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि संस्कृत और अवधि भाषा के कई प्रसिद्ध एवं प्राचीन महाकवियों ने भी अपनी कविताओं और काव्यों में होली को वर्णित किया है।

धर्मग्रंथों में वर्णित होलिका दहन का संबंध भक्त प्रहलाद, असुर नरेश हिरण्यकश्यप और होलिका से माना गया है। कहते हैं कि राक्षस राज हिरण्यकश्यप को अपने पुत्र प्रहलाद की विष्णु भक्ति पसंद नहीं थी, इसलिए अपने पुत्र पर उसने तरह-तरह के अत्याचार किए और कष्ट दिए। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि अग्नि उसे भस्म नहीं कर सकती थी इसलिए अंत में अपने पुत्र की हत्या के लिए हिरण्यकश्यप की बहन होलिका प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई जिससे उसकी मृत्यु हो जाए। लेकिन, भगवान विष्णु ने अपने भक्त की रक्षा की और होलिका उस अग्नि में जलकर राख हो गई और तब से ही होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है। 

बांके बिहारी और मथुरा में कब मनाई जाएगी होली?

रंगों का त्योहार होली भगवान श्रीकृष्ण को सर्वाधिक प्रिय है इसलिए ब्रज, मथुरा और वृंदावन में होली का अलग ही जश्न देखने को मिलता है। यहाँ होली का पर्व 40 दिनों तक चलता है और इसमें रंगों के साथ-साथ फूलों, लड्डू और लट्‌ठमार होली खेली जाती है। इस बार वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में होली 12 मार्च 2025 को खेली जाएगी जबकि बरसाना में लट्ठमार होली का आयोजन 8 मार्च, 2025 को किया जाएगा और नंदगांव में 09 मार्च 2025 को होली खेली जाएगी। 

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होलिका दहन 2025: पूजा विधि

  • होलिका दहन की पूजा करने के लिए जातक प्रातःकाल उठकर सर्वप्रथम नित्य कामों से निवृत्त होकर स्नान करें।
  • स्नान करने के पश्चात होलिका पूजन के स्थान पर उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके बैठ जाएं।
  • होलिका दहन की पूजा करने के लिए गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा का निर्माण करें। 
  • इसके बाद, इस पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री जैसे कि रोली, फूलों की माला, फूल, गुड़, कच्चा सूत, मूंग, गुलाल, साबुत हल्दी, 5 से 7 तरह के अनाज, नारियल और एक लोटे में पानी लें।
  • अब इन सभी पूजन सामग्री को एकत्रित करके पूरे विधि-विधान से होलिका दहन की पूजा करें। प्रसाद के रूप में मिठाइयां और फल आदि अर्पित करें। 
  • होलिका दहन की पूजा संपन्न करने के साथ ही भगवान नरसिंह की भी पूरी विधि-विधान से पूजा करें। इसके उपरांत, होलिका के चारों तरफ सात बार परिक्रमा करें। 

चलिए अब आपको अवगत करवाते हैं होलाष्टक 2025 के बारे में। 

होलाष्टक 2025: इस दौरान न करें शुभ कार्य

जहां होली खुशियों, उत्साह और उमंग का पर्व है, वहीं इसके पहले के आठ दिन बेहद अशुभ माने जाते हैं। फाल्गुन मास की अष्टमी तिथि से फाल्गुन पूर्णिमा तक की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है। यह आठ दिन किसी भी काम के लिए शुभ नहीं होते हैं और इस दौरान मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए। मान्यता है कि होलाष्टक के आठ दिनों में भक्त प्रहलाद पर अनेक प्रकार के अत्याचार किए गए थे और इस वजह से इन दिनों में ग्रह-नक्षत्र काफी उग्र हो जाते हैं। यह सभी ग्रह फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर शांत होते हैं। 

ज्योतिष की मानें तो, होलाष्टक पर सभी आठ ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं। इस समय अष्टमी तिथि पर चंद्रमा, नवमी पर सूर्य, दशमी पर शनि, एकादशी पर शुक्र, द्वादशी पर गुरु, त्रयोदशी पर बुध, चतुर्दशी पर मंगल और पूर्णिमा तिथि पर राहु उग्र हो जाते हैं इसलिए होलाष्टक के दौरान शुभ काम करना वर्जित होता है। कहते हैं कि इस अवधि में किए गए कार्य के सफल होने की संभावना बेहद कम होती है। वर्ष 2025 में होलाष्टक की शुरुआत 07 मार्च 2025, शुक्रवार को होगी और इसका अंत होलिका दहन के साथ अर्थात 13 मार्च 2025 को पूर्णिमा तिथि पर हो जाएगा।

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होलिका दहन को भूल से भी न देखें ये 3 लोग 

होलाष्टक के बारे में आपको बताने के बाद अब हम बात करेंगे ऐसे 3 लोगों की जिन्हें होलिका दहन देखने से बचना चाहिए।   

गर्भवती महिलाएं: ऐसा माना जाता है कि होलिका की परिक्रमा गर्भवती स्त्रियों को नहीं करनी चाहिए क्योंकि होलिका दहन की अग्नि मां और शिशु दोनों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। 

नवजात शिशु: होलिका दहन का बुरा असर नवजात शिशु पर भी पड़ता है इसलिए इनको भी होलिका दहन नहीं देखना चाहिए क्योंकि यह अशुभ माना जाता है। होलिका दहन वाले स्थान पर नकारात्मक शक्तियां उपस्थित होती हैं इसलिए इस जगह से शिशु को दूर रखें। 

सास-बहू: सदियों से मान्यता चली आ रही है कि नव विवाहित महिलाओं को अपनी सास के साथ होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने से सास-बहु के रिश्ते में खटास आ जाती है। शादी के बाद की पहली होली मायके में ही खेलनी चाहिए। मायके में बेटी और दामाद के मायके में होली खेलने की परंपरा काफ़ी पुराने समय से चली आ रही है।

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नकारात्मकता से सुरक्षा के लिए होलिका दहन पर राशि अनुसार अग्नि में अर्पित करें ये चीज़ें

मेष राशि

मेष राशि वाले होलिका दहन की अग्नि में गुरु ग्रह से जुड़ी वस्तुओं जैसे शहद या हल्दी अर्पित करें। ऐसा करना आपके लिए फलदायी सिद्ध होगा। 

वृषभ राशि 

होलिका दहन की अग्नि में वृषभ राशि के जातक के लिए चावल या शहद डालना शुभ रहेगा। इससे आपले जीवन की समस्याएं दूर होंगी।

मिथुन राशि 

मिथुन राशि वालों को होलिका दहन की अग्नि में तिल या काले चने जैसी वस्तुएं अर्पित करनी चाहिए।

कर्क राशि 

कर्क राशि के जातकों को होलिका दहन की अग्नि में दूध से बनी मिठाई या फिर खीर आदि चढ़ाने से शुभ फलों की प्राप्ति होगी। 

सिंह राशि 

सिंह राशि वालों को होलिका दहन के दिन अग्नि में गुरु ग्रह से संबंधित वस्तुओं जैसे कि गाय का घी और केसर अर्पित करना चाहिए। साथ ही, पीले रंग के अपने पुराने वस्त्र दान करें।

कन्या राशि

कन्या राशि वालों को होलिका दहन की अग्नि में बताशे और केसर अर्पित करने से शुभ फलों की प्राप्ति होगी। 

तुला राशि

तुला राशि वाले होलिका दहन के समय अग्नि में शुक्र ग्रह से जुड़ी वस्तुएं जैसे कि चावल, बूरा या पनीर आदि डाल सकते हैं।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातक होलिका दहन के दिन बुध देव से संबंधित चीज़ें कपूर या हरी मिर्च आदि अग्नि में डालें। 

धनु राशि 

धनु राशि वाले होलिका दहन पर दो लौंग घी में भिगोकर एक पान के पत्ते पर रखकर अग्नि में अर्पित करें।

मकर राशि

मकर राशि के जातक होलिका दहन की संध्या के समय एक सूखा नारियल लेकर उसे अपने सिर के ऊपर से दो बार घुमाकर अग्नि में डालें। 

कुंभ राशि

कुंभ राशि वालों को जीवन में उत्पन्न बाधाओं के निवारण के लिए होलिका दहन की अग्नि में काली उड़द की दाल और बताशे अर्पित करने चाहिए।

मीन राशि 

मीन राशि के जातक होलिका दहन की अग्नि में नारियल से बनी मिठाई या फिर साबुत नारियल अर्पित करें। 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होलिका दहन 2025 में कब है?

साल 2025 में होलिका दहन का पर्व 13 मार्च 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा। 

2025 में रंग वाली होली कब खेली जाएगी?

इस वर्ष छोटी होली 14 मार्च 2025, शुक्रवार को मनाई जाएगी। 

साल 2025 का पहला चंद्र ग्रहण कब है?

वर्ष 2025 का पहला चंद्र ग्रहण 14 मार्च 2025 को होली पर लगेगा।