Saturn Transit In Pisces After 30 Years: Zodiacs Could See Bad Times

हिन्दू नववर्ष 2025: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (विक्रमी संवत् 2082) की विशेष भविष्यवाणी

हिंदू नव वर्ष 2025 इस बार 29 मार्च 2025 शनिवार की शाम 16 बजकर 27 मिनट से आरंभ हो जाएगा। लेकिन, सूर्योदय कालीन तिथि ग्रहण करने के कारण सनातन धर्म का नव वर्ष 2025 यानी कि विक्रम संवत् 2082 इस वर्ष 30 मार्च 2025 रविवार के दिन मनाया जाएगा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हिंदू नव वर्ष की शुरुआत माना जाता है और इसी दिन से विक्रम संवत बदल जाता है। इस बार 29 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा प्रारंभ होगी, लेकिन उदया तिथि के अनुसार, चैत्र नवरात्रि और नव वर्ष उत्सव 30 मार्च 2025, रविवार के दिन पूरे हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। 

सनातन धर्म प्राचीन काल से ही अस्तित्व में रहा है और चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हिंदू धर्म का नव वर्ष मनाया जाता है इसलिए यह सभी सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के लिए एक विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है जो इस वर्ष भी प्रत्येक वर्ष की भांति भक्ति भाव और भव्य तरीके से मनाया जाएगा। सनातन धर्म के लोग इस पर्व को पूरे विधि-विधान और उत्साह के साथ मनाएंगे। मां दुर्गा की शक्ति आराधना का पवित्र पावन चैत्र नवरात्रि भी 30 मार्च 2025 से शुरू हो जाएगा और इसी दिन घट स्थापना भी होगी।

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चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को नूतन संवत्सर का आरंभ होता है। यह विशेष दिन सभी के लिए अत्यंत शुभ समय लेकर आता है। यही वजह है कि इस दिन को सभी अपने निवास स्थान पर अपने कुल गोत्र और संप्रदाय के अनुसार ध्वज लगाकर विधि विधान से मनाते हैं। इस दिन अपने घर को सजाना चाहिए, प्रकाश करना चाहिए, मंगल गीत गाने चाहिए, रोशनी करनी चाहिए, तोरण को लगाना चाहिए तथा मंगल स्नान करने के बाद इस दिन विशेष रूप से देवी-देवताओं, कुल पुरोहित, ब्राह्मणों, गुरुजनों और धर्म ध्वज की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दिन विशेष रूप से अपने ध्वज के नीचे बैठकर सभी को पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दिन नए वस्त्र-आभूषण धारण करने चाहिए और अपने व्यक्तिगत ज्योतिषी से नए संवत्सर का भविष्यफल भी जानना चाहिए जिससे आप अपने आने वाले समय को और बेहतर बना सकें।

नए संवत्सर का आरंभ होना यानी हिंदू नव वर्ष का शुरू होना सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है इसलिए ज्योतिषी से पूरे वर्ष का पूर्ण अवलोकन भी करवा लेना चाहिए। इससे हमें पता चलता है कि हमारे जीवन में किस प्रकार की घटनाएं पूरे वर्ष संवत्सर के दौरान घट सकती हैं। हम यह भी जानने की उत्सुकता रखते हैं कि नया संवत्सर हमारे देश और दुनिया के लिए तथा आम इंसान के लिए किस प्रकार के परिणाम लेकर आएगा? ईश्वर की कृपा से और ग्रहों के गोचर एवं चाल के परिणाम स्वरूप किस प्रकार के परिणाम हम सभी को प्राप्त होंगे। 

इस वजह से हम चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी कि वर्ष लग्न कुंडली का विशेष रूप से अवलोकन करते हैं। जब भी हमें नव वर्ष के बारे में भविष्यवाणी करने की आवश्यकता होती है, तो हम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी कि वर्ष लग्न कुंडली का अवलोकन विशेष रूप से करते हैं और उसके साथ ही वर्ष जगत लग्न कुंडली का भी अवलोकन करते हैं। इन्हीं के आधार पर पूरे संवत्सर में होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं के बारे में पूर्ण रूप से विचार किया जाता है और यह जानने का प्रयास किया जाता है कि आने वाला संवत्सर किस प्रकार की अच्छी और बुरी परिस्थितियों को जन्म देने वाला है।

(चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 2025 वर्ष लग्न कुंडली)

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हिंदू नव वर्ष 2025 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत् 2082 जिसे हम नूतन वर्षारंभ या नूतन संवत्सर आरंभ भी कहते हैं, उसकी कुंडली सिंह लग्न की बनी है। लग्न के स्वामी सूर्य महाराज अष्टम भाव में चंद्रमा, बुध, शुक्र और राहु के साथ विराजमान हैं। शनि महाराज कुंभ राशि में सप्तम भाव में विराजमान हैं और केतु दूसरे भाव में कन्या राशि में हैं। बृहस्पति महाराज वृषभ राशि में दशम भाव में उपस्थित हैं, तो मंगल महाराज मिथुन राशि में एकादश भाव में उपस्थित हैं। यहां पर ध्यान देने की बात है कि चंद्रमा, बुध और शनि अस्त अवस्था में हैं जबकि शुक्र वक्री अवस्था में विराजमान हैं। मंगल भाग्य स्थान के स्वामी होकर एकादश भाव में विराजमान हैं जबकि पंचमेश और अष्टमेश बृहस्पति दशम भाव में विराजित हैं।

लग्नेश सूर्य का अष्टम भाव में जाना ज्यादा अनुकूल नहीं है, लेकिन त्रिकोणेश बृहस्पति का दशमस्थ केंद्र में जाना राजयोग कारक परिणाम देने में सक्षम है। मंगल की स्थिति भी अनुकूल है। सप्तम भाव में शनि स्वराशि में होकर मजबूत और दिग्बली अवस्था में हैं। विपरीत राजयोग की स्थितियां भी निर्मित हो रही हैं।

अभी ऊपर हमने यह जाना कि नूतन वर्ष 2025 की प्रवेश लग्न कुंडली में ग्रह किस स्थिति में हैं और कौन से ग्रह कौन सी राशियों में गोचर कर रहे हैं जिससे हमारे जीवन पर विभिन्न प्रकार के प्रभाव पड़ सकते हैं। चलिए अब आगे बढ़ते हैं और यह जानने का प्रयास करते हैं कि वर्ष लग्न कुंडली के अनुसार नूतन संवत्सर 2082 यानी हिंदू नव वर्ष 2025 हमारे देश और देशवासियों के लिए तथा अन्य देशों और उनमें रहने वाले लोगों को किस तरह से प्रभावित करने की संभावना है:

  • उपरोक्त कुंडली में मीन राशि में सूर्य, बुध, चंद्र, शुक्र और राहु ये पांच ग्रह विराजमान हैं। सूर्य लग्नेश अष्टम भाव में उपस्थित हैं जो कि प्राकृतिक आपदाओं को दर्शाता है और ऐसे में, प्राकृतिक प्रकोप, प्राकृतिक आपदाएं, राजनीतिक आपदा, भूकंप, बाढ़, अग्निकांड आदि के कारण जन-धन की हानि होने के योग बन सकते हैं। 
  • सप्तम भाव में शनि अपनी राशि में उपस्थित होकर लग्न को देख रहे हैं जो कि कुछ जटिल समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। 
  • ग्रहों की स्थिति के अनुसार, पूर्व और उत्तर-पश्चिम तथा दक्षिण की ओर से भारत के विरोधी देश अपनी कुछ सक्रियता दिखा सकते हैं। इसके प्रति सरकार को सतर्क रहना होगा। 
  • बृहस्पति महाराज राजयोग निर्मित कर रहे हैं और चतुर्थ भाव पर दृष्टि डाल रहे हैं जिससे भारत की आर्थिक समृद्धि बढ़ने के योग बनेंगे। विश्व पटल पर भारत की प्रगति आश्चर्यजनक रूप से होने की संभावना बनेगी। 
  • नवम स्थान पर शनि की दृष्टि होने के कारण राजनीतिक क्षेत्र में उठापटक होने के योग बनेंगे। कई राजनीतिक पार्टियों में एकता बढ़ने की स्थिति बनेगी, लेकिन भाजपा का प्रभाव बढ़ने के योग बनेंगे।
  • वर्ष 2082 की वर्ष प्रवेश कुंडली में सिंह लग्न उदित हो रहा है। यह संवत् आम जनजीवन के लिए और विशेष रूप से कृषक समुदाय के लिए ज्यादा लाभप्रद होने की संभावना नहीं है। 
  • देश के दक्षिणी राज्यों में जीव-जंतुओं से कष्ट होने की संभावना जनता को हो सकती है। 
  • आमतौर पर ग्रहों की इस स्थिति के अनुसार छह महीने तक अनाज के सस्ते होने की संभावना बनेगी। कुछ स्थानों पर बादल फटने जैसी स्थिति और भारी वर्षा से जनहानि के समाचार मिल सकते हैं। 
  • देश के पश्चिमी राज्यों में धातुएं महंगी हो सकती हैं जैसे सोना आदि। वहीं, देश के उत्तरी भागों में अधिक वर्षा से हानिकारक घटनाएं हो सकती हैं। 
  • देश के पूर्वी भाग में कृषि वर्ग को भारी हानि उठानी पड़ सकती है जबकि देश के मध्य में स्थित राज्यों में राजनीतिज्ञों में मतभेद और शासन सत्ता में उलटफेर होने के योग बन सकते हैं।
  • भारत की प्रभाव राशि मकर है जिसके स्वामी शनि स्वराशि के होने से आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रगति होने के योग बनेंगे।

(जगत् लग्न कुंडली संवत् 2082)

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उपरोक्त कुंडली कुंभ लग्न की है जिसके स्वामी शनि उच्च राशि के शुक्र, राहु और बुध के साथ दूसरे भाव में विराजमान हैं। कन्या राशि में अष्टम भाव में केतु उपस्थित हैं। सूर्य मेष राशि में तीसरे भाव में, बृहस्पति वृषभ राशि में दूसरे भाव में, मंगल अपनी नीच राशि कर्क में छठे भाव में और चंद्रमा तुला राशि में नवम भाव में विराजमान हैं। आइए जानते हैं इस कुंडली से आने वाले समय की क्या जानकारी मिलती है: 

  • जगत लग्न कुंडली में लग्नेश शनि और भारत की प्रभाव राशि मकर के स्वामी शनि पंचमेश और अष्टमेश बुध के साथ शुक्र व राहु संयुक्त विराजमान हैं। इसके परिणामस्वरूप, भारत के सीमावर्ती प्रांतों जैसे कि लद्दाख, मिजोरम, कश्मीर आदि अशांत क्षेत्रों में सैन्य क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। भारत के शत्रु देश विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान आदि की गतिविधियां और कुछ अवांछित घटनाएं अशांति उत्पन्न कर सकती हैं। नीच राशि के मंगल छठे भाव में बैठकर चंद्रमा को देख रहे हैं और उनकी कुंभ लग्न पर दृष्टि भी है जिससे अश्विन और पौष मास के बीच किसी प्रकार की महामारी जैसी परेशानी उत्पन्न होने की संभावना बन सकती है। 
  • इस कुंडली में बृहस्पति महाराज जो आय भाव और धन भाव के स्वामी हैं। वह चतुर्थ भाव में विराजमान हैं जिससे भारत का व्यापार तेजी से बढ़ेगा और देश की प्रगति होगी और अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा। 
  • सूर्य के तीसरे भाव में उच्च राशि में और शुभ ग्रह बृहस्पति के केंद्र भाव में होने से भारत में खुशहाली के योग बन सकते हैं।
  • लग्नेश शनि के दूसरे भाव में राहु, बुध व शुक्र के साथ विराजमान होने के कारण विश्व में मुस्लिम राष्ट्रों जैसे कि इजरायल, ईरान आदि में प्रतिशोध की भावना बढ़ सकती है जिससे युद्ध,अपराध और मानवता के खिलाफ अशांति का वातावरण उत्पन्न हो सकता है। 
  • यूक्रेन और रूस के युद्ध के बीच विश्व के कुछ अन्य देशों में भी प्रतिशोध की भावना विश्व की शांति को भंग करने का कार्य कर सकती है। 
  • जगत लग्न कुंडली में शुक्र नवमेश होकर शनि और राहु के साथ बैठे हैं जिससे ऊर्जा संयंत्र और परमाणु क्षेत्र क्षतिग्रस्त होने का खतरा भी बना रहेगा। इन पर संकट मंडराता रहेगा जिससे दुनिया डर के वातावरण में जीने को मजबूर हो सकती है। 
  • दूसरे भाव में राहु, बुध और शुक्र, शनि के साथ विराजमान होने से भारत की आर्थिक स्थिति अच्छी होने की कगार पर आएगी। लेकिन, उसके लिए हद से ज्यादा प्रयास करने की आवश्यकता पड़ेगी और कुछ नए उद्योग-धंधों की स्थापना करना आवश्यक होगा।
  • उपरोक्त ग्रह स्थितियों के अनुसार, जुलाई 2025 तक यूरोपीय देशों के लिए समय कठिन रहेगा। हत्याकांड, भूकंप, समुद्री तूफान जैसी स्थितियां बन सकती हैं। जून-जुलाई में शनि मंगल का षडाष्टक योग भी युद्ध जैसी अशांति दे सकता है।
  • जून 2025 से अगस्त 2025 के बीच यूरोपीय देशों में भयंकर अशांति फैलने के योग बन सकते हैं। शनि और मंगल के समसप्तक संबंध और कुंभ राशि के राहु के कारण आतंकवादी घटनाओं में भी बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही, कई क्षेत्रों में युद्ध जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसी समय समुद्री तूफान, भूकंप, आदि की स्थिति भी बनेगी और किसी अत्यंत प्रतिष्ठित व्यक्ति का पद खाली हो सकता है। 
  • इस दौरान चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राजील, रूस, जर्मनी, पोलैंड, इजरायल, ईरान, यूक्रेन, हंगरी जैसे देशों के बीच शस्त्रों की होड़ दिखाई देगी जिससे विश्व का वातावरण अशांत हो सकता है। 
  • भारत के संदर्भ में बात करें तो, मार्च से अप्रैल तक शनि-मंगल की स्थिति भारत की राजनीतिक पार्टियों के बीच अति महत्वपूर्ण रह सकती है जिससे राजनीतिक दलों में प्रलोभन की प्रवृत्ति बढ़ेगी और उससे निराशाजनक परिणाम मिलेंगे। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी का प्रभुत्व अभी बना रहने की संभावना है। 
  • शनि और राहु का प्रभाव म‌ई के अंत तक किसी अत्यंत महत्वपूर्ण व्यक्ति के लिए विशेष दुखद रहने की संभावना है। 
  • इसी दौरान मंगल और राहु का षडाष्टक योग और शनि की सूर्य पर दृष्टि भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकवाद के कारण अशांति को जन्म दे सकती है। 
  • इस दौरान नाटो देशों में भी परस्पर वैमनस्य बढ़ने की संभावना रहेगी। 
  • जून से जुलाई के अंत तक का समय राजनीति के लिए कठिन रहेगा। इस दौरान छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कश्मीर, उत्तर प्रदेश में अवांछित घटनाक्रम और अभूतपूर्व घटनाएं हो सकती हैं। भारत के सीमावर्ती प्रांत चीन और पाकिस्तान की गतिविधियों से अशांत हो सकते हैं। 
  • अगस्त से सितंबर के मध्य तक का समय शनि और मंगल की स्थिति के कारण राजनीतिक अस्थिरता और अशांति का संकेत दे रहा है। इस दौरान चीन और पाकिस्तान की गतिविधियों से सावधान रहना बहुत ज्यादा आवश्यक होगा। 
  • शनि-मंगल और सूर्य-राहु की स्थिति इस वर्ष अनेक चुनौतीपूर्ण स्थितियों को अंजाम दे सकती हैं जिनमें एलओसी पर साइबर अटैक, अफगानिस्तान में नए युद्ध का सूत्रपात होने और पाकिस्तान में आंतरिक विद्रोह या विस्फोट आदि से भारी हानि होने के योग बन सकते हैं। इसी प्रकार, भारत में मई से सितंबर के बीच बंगाल, महाराष्ट्र, असम, छत्तीसगढ़, पंजाब, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में आतंकवाद अथवा सांप्रदायिक उपद्रव से अशांति फैल सकती है। 
  • इसी दौरान भारत की सरकार संविधान में संशोधन को विशेष महत्व देगी। 
  • इस प्रकार कहा जा सकता है कि अष्टम भाव में ग्रहों का अधिक प्रभाव होने के कारण प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति बन सकती है जिसके प्रति आपदा मोचन बल और अन्य सेवाओं को सतर्क रहने की आवश्यकता पड़ेगी। हालांकि, अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत को विशेष रूप से सम्मान और सफलता प्राप्त होने के योग बन सकते हैं। 

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हिन्दू नववर्ष 2025 – चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (नूतन संवत्सर २०८२)  का महत्व एवं प्रभाव

चैत्रे मासि जगद्ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेऽहनि।

शुक्लपक्षे समग्रं तु तदा सूर्योदय सति।।

                                                                     -हेमाद्रौ ब्राहोक्तेः  

जब कभी हम हिंदू नव वर्ष या नूतन संवत्सर के बारे में बातचीत करते हैं, तो हेमाद्री के ब्रह्म पुराण के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सूर्योदय के समय जगत पिता ब्रह्मदेव जी ने इस संपूर्ण चराचर जगत की रचना की थी। यही वजह है कि प्रत्येक सनातन धर्मी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि यानी प्रतिपदा तिथि को नूतन संवत्सर का आरंभ मानता है इसलिए हिंदू नव वर्ष का प्रारंभ इसी दिन से माना जाता है और यहीं से नया विक्रमी संवत् भी शुरू होता है। यदि अंग्रेजी कैलेंडर वर्ष 2025 की बात करें तो, 29 मार्च, 2025 शनिवार को शाम 16:27 बजे उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, ब्रह्म योग और किंस्तुघ्न करण में मीन राशि में नव संवत्सर का प्रवेश होगा। यह विक्रम संवत् 2082 कहलाएगा तथा इसका नाम “सिद्धार्थी” नामक संवत्सर होगा।

चूंकि इस वर्ष संवत्सर का प्रवेश सायंकाल के समय होगा, तो सूर्योदय कालीन तिथि लेने के कारण सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि उपस्थित होगी इसलिए चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के नवरात्रि का प्रारंभ अगले दिन यानी 30 मार्च, 2025 रविवार को होगा। रविवार से ही जप, पाठ, पूजन, दान, व्रत, अनुष्ठान, यज्ञ आदि धार्मिक कार्य किए जाएंगे। सूर्योदय कालीन तिथि के कारण चैत्र शुक्ल प्रतिपदा रविवार के दिन मनाई जाएगी इसलिए रविवार को शुरू होने के कारण इस संवत्सर के राजा सूर्य होंगे। यह संवत्सर बार्हस्पत्यमान (गुरु मान) से शिव (रूद्र) विंशति के अंतर्गत एकादश युग का तृतीय सिद्धार्थी नामक (संवत्सर में 53 वां) संवत्सर होगा।

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सिद्धार्थी नामक नूतन संवत्सर 2082 का फल 

नूतन संवत्सर 2082 का नाम सिद्धार्थी नामक संवत्सर है जिसका फल शास्त्रों में निम्न प्रकार बताया गया है:

सिद्धार्थवत्सरे भूयो ज्ञान वैराग्य युक्त प्रजा:।

सकला वसुधा भाति बहुसस्य अर्घ वृष्टिभि:।।

इसका तात्पर्य है कि सिद्धार्थी नामक संवत्सर के दौरान प्रजा ज्ञान, वैराग्य जैसे विषयों में विशेष रूप से रुचि महसूस करेगी। धार्मिक आयोजन विशेष रूप से आयोजित किए जाएंगे और इनमें अधिकता रहेगी। वर्ष में अच्छी वर्षा हो सकती है और प्रतिकूल जलवायु के उपरांत भी अच्छा उत्पादन देखने को मिल सकता है। शासन तंत्र में स्थिरता की स्थिति बनी रह सकती है। संपूर्ण पृथ्वी पर प्रसन्नता का योग बनेगा। इस संवत्सर के स्वामी सूर्य देव हैं, इस कारण से देश में सुकाल के बावजूद प्रजा असंतुष्टि की भावना से भरी रह सकती है। धन की मांग अधिक रह सकती है। चैत्र के महीने में आय में वृद्धि होने की संभावना है जबकि वैशाख में कुछ मंदी रहेगी। वैशाख और ज्येष्ठ में लोगों को पीड़ा और युद्ध का भय हो सकता है। भाद्रपद में खंड वृष्टि होगी जिससे वर्षा कम होगी। अश्विन में रोग और पीड़ा होने की संभावना रहेगी तथा धन में वृद्धि की रफ़्तार भी औसत रह सकती है जबकि मार्गशीर्ष आदि चार महीनों में राज्य में विरोध, प्रजा में अशांति तथा धान्य, आदि आवश्यक वस्तुओं में तेजी की स्थिति बनी रह सकती है।

तोयपूर्णा: भवेन्मेघा: बहुसस्या च मेदिनी। 

सुखिनः पार्थिवाः सर्वे सिद्धार्थे वरवर्णिनि।।

इसका तात्पर्य है कि इस संवत्सर में वर्षा पर्याप्त होने की संभावना बनेगी। खाद्य पदार्थ एवं जन जीवन के उपयोग में आने वाली वस्तुओं की उपलब्धता पर्याप्त हो सकती है। शासन में राजनीतिक स्थिरता बने रहने की संभावना है, लेकिन कुछ प्रदेशों में अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति बन सकती है।

इसके अतिरिक्त, वर्ष प्रबोध ग्रंथ के अनुसार सिद्धार्थी संवत्सर का फल जानने का प्रयास करें, तो उसके अनुसार चैत्र और वैशाख माह में जनता रोग आदि से परेशान हो सकती है। ज्येष्ठ और आषाढ़ में प्राकृतिक प्रकोप होने और श्रावण मास में भयंकर वर्षा से हानि हो सकती है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से समय कुछ अनुकूल रह सकता है।

 नूतन संवत्सर 2082 के राजा

चैत्रसितप्रतिपदि यो वारोऽर्कोदये सः वर्षेशः। 

                                                                      -ज्योतिर्निबन्ध

उपरोक्त वर्णित श्लोक ज्योतिर्निबन्ध में दिया गया है। इस श्लोक का तात्पर्य है कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को सूर्योदयकालीन समय पर जो भी वार या दिन होता है, उस वार के अनुसार ही उस संवत्सर का राजा घोषित किया जाता है। इस बार नूतन संवत्सर 2082 में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शनिवार 29 मार्च को आएगी, लेकिन सूर्योदय कालीन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अगले दिन रविवार को व्याप्त होने के कारण इस बार हिंदू नव वर्ष विक्रमी संवत् 2082 के राजा रवि (सूर्य) होंगे।

नूतन संवत्सर (वर्ष) 2082 के विशेष एवं महत्वपूर्ण बिंदु

वर्ष लग्न – सिंह  

नक्षत्र – उत्तरा भाद्रपद 

योग – ब्रह्म

करण – किंस्तुघ्न  

नूतन संवत्सर (वर्ष) 2082 के विभिन्न पदाधिकारी

राजा – रवि (सूर्य)

मंत्री – रवि

सस्येश – बुध  

धान्येश – चंद्र 

मेघेश – सूर्य

रसेश – शुक्र  

नीरसेश – बुध  

फलेश – शनि 

धनेश – मंगल 

दुर्गेश – शनि  

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हिन्दू नववर्ष नूतन संवत्सर 2082 के अधिकारी और उनका प्रभाव

विक्रमी सम्वत् 2082 के राजा सूर्य (आदित्य)

सूर्यनृपे स्वल्पफलाश्चमेघाः स्वल्पं पयोगौषुजनेषुपीड़ा।

स्वल्पं सुधान्यंफलस्वल्प वृक्षाश्चौराग्निबाधानिधनंनृपानाम्।।

उपरोक्त श्लोक के अनुसार, संवत्सर का राजा सूर्य होने पर देश के कुछ क्षेत्रों में उपयोगी वर्ष की कमी हो सकती है। दूध देने वाले जानवर जैसे कि गाय, भैंस आदि दूध कम देंगे। सामान्य जनमानस में दुख, कलह, क्लेश, विग्रह, कष्ट बढ़ सकते हैं। धान, गन्ना, आदि फसलों, फल, फूल और मौसमी फलों का उत्पादन कम होने की संभावना बनेगी। राजनेताओं और प्रशासकों में परस्पर टकराव और विरोध अधिक रह सकता है। डकैती, चोरी, ठगी, लूटमार, रेल अग्निकांड, आदि की घटनाएं अधिक होने के योग बन सकते हैं। सांप्रदायिक उपद्रव और कट्टरवाद जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।

लोगों के बीच उत्तेजना, क्रोध, कलह और आंखों से जुड़े गंभीर रोग आदि बढ़ सकते हैं। लोगों के मन में राजसिक प्रवृत्ति बढ़ने के योग बनेंगे। इसके अतिरिक्त, किसी बड़े राजनेता का आकस्मिक निधन होने से देश में शोक की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। राजा के पद पर नूतन संवत्सर 2082 में सूर्य के आसीन होने के कारण इस संवत्सर का वाहन अश्व रहेगा। दूध और फलों के कम उत्पादन और वर्ष में कमी से महंगाई बढ़ने के योग बन सकते हैं। कई सत्ताधीशों  के अधिकारों की हानि हो सकती है और कुछ राज्यों में सत्ता परिवर्तन और मंत्रिमंडल में फेरबदल के योग बन सकते हैं।

तीक्ष्णोऽर्कः स्वल्पसस्यश्च गतमेघेऽतितस्करः।

बहूरग-व्याधिगणो भास्कराब्दो-रणाकुलः।।

संवत्सर का राजा सूर्य होने के कारण फल, औषधि, कृषि और अन्य उत्पादों में कमी हो सकती है। प्रतिकूल वर्षा होने से खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है। पाखंडियों, तस्करों, अपराधियों, चोरों और लुटेरों का प्रभुत्व बढ़ सकता है। असाध्य रोग और विचित्र प्रकार की शारीरिक समस्याओं का प्रसार होने का भय रहेगा। सीमावर्ती प्रांतों में उग्रवादी घटनाओं और छद्म युद्ध में खतरनाक अस्त्रों का प्रयोग होने की आशंका है। साथ ही, अग्निकांड जैसी घटनाएं हो सकती हैं, राजनीतिक दलों में परस्पर मतभेद और विरोध चरम सीमा तक पहुंचने के योग बनेंगे। जंगलों में आग लगने से वन संपदा की हानि और शरद ऋतु में सर्दी कम पड़ने तथा गर्मी में बढ़ोतरी होने की संभावना है। रेंगने वाले और जंगली जानवरों का आम जनमानस की बस्तियों में प्रवेश हो सकता है। सज्जन लोगों को कष्ट हो सकता है तथा बाढ़ जैसी विपरीत परिस्थितियों में पशुधन की हानि हो सकती हैं।

वर्ष का मंत्री सूर्य ग्रह

नृपभयं गदतोऽपि हि तस्करात् प्रचुर धान्यधनादि महीतले।

रसचयं हिसमर्घतमन्दतारविमात्यबदांहिसमागतः।।

नए संवत्सर के मंत्री पद पर भी सूर्य देव ही विराजमान होंगे जिसके परिणामस्वरूप, राजाओं यानी राजनेताओं को भय होने, राजनीतिक पार्टियों और प्रशंसकों में परस्पर विरोध और टकराव बढ़ने के योग बनेंगे। इसके अतिरिक्त, केंद्र व राज्य सरकारों में भी मतभेद बढ़ सकता है। धन-धान्य आदि सुख-साधनों में वृद्धि होगी, परंतु कठोर सरकारी नीति और गतिविधियों के कारण तथा चोर, लुटेरों और डकैतों के कारण प्रजा में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कठिन और असाध्य रोगों की अधिकता होने से जनता में अराजकता रह सकती है। दूध, तेल, पेयजल, फल, सब्जियां, चीनी, इत्यादि रसदार वस्तुओं की कमी और उनके दामों में तेजी आने के योग बन सकते हैं। जन उपयोगी वस्तुओं के मूल्य में भी तेजी आ सकती है। सूर्य के मंत्री पद पर बैठने से संवत्सर में प्रशासनिक कठोरता बढ़ने के योग बनेंगे। चोरी, तस्करी और जीएसटी चोरी जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं, लेकिन जीडीपी में सुधार होने की स्थिति बनेगी। धन में वृद्धि और इंपोर्ट से महंगाई पर नियंत्रण पाने के प्रयास किए जा सकते हैं। खांड, शक्कर, तेल, घी, आदि की मांग में कमी आ सकती है।

वर्ष का सस्येश बुध ग्रह

जलधराजलराशिमुचोभृशं सुख समृद्धि युतं निरूपद्रवम्।

द्विजगणाः स्तुति पाठरताः सदा प्रथमसस्यपतौसतिबोधने।।

सस्येश यानी ग्रीष्मकालीन फसलों का स्वामी बुध ग्रह होने से देश में वर्षा अधिक होने के योग बनते हैं। लोगों के जीवन में सुख और समृद्धि का वातावरण रहता है, लेकिन महंगाई और खर्चों में बढ़ोतरी होने के योग बनते हैं। सामाजिक स्थिति शांतिपूर्ण रहने की स्थिति बनती है। जो बुद्धिजीवी वर्ग के लोग हैं, उनकी शासन तंत्र द्वारा प्रशंसा होती है जबकि विभिन्न प्रकार के उपद्रवों और आतंक आदि की घटनाओं में अपेक्षाकृत कमी होने के योग बनते हैं। द्विजगण, ब्रह्म वेद अध्ययन करने वाले, हवन करने वाले, धार्मिक कार्यों में और अधिक प्रवृत्त होने लगेंगे। बुद्धिजीवी लोग अध्ययन और अध्यापन के कार्यों में अधिक सक्रिय होंगे और इनमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे, उच्च तकनीकी की तरफ लोगों का विशेष रुझान देखने को मिल सकता है।

वर्ष का धान्येश चन्द्र ग्रह

चन्द्रेधान्याधिपतेजातेप्रजावृद्धिः प्रजायते। 

गोधूमाःसर्षपाश्चैव गोषुक्षीरंतदाबहुः।।

धान्येश यानी कि शीतकालीन फसलों का स्वामी ग्रह यदि चंद्रमा बनता है, तो इस वर्ष के दौरान शीतकाल में होने वाली फसलों जैसे कि चना, कपास, सरसों, सोयाबीन, गेहूं, अन्य धान्य सहित गाय का घी, गाय का दूध आदि के उत्पादन में विशेष वृद्धि होने के योग बनेंगे। श्रेष्ठ, अच्छी तथा उपयोगी वर्षा होने की संभावना बढ़ जाती है। धरती पर नदी, तालाब में जल का स्तर अच्छा रहता है तथा लोगों के मध्य उत्साह बने रहने की स्थिति बनती है।

वर्ष का मेघेश सूर्य ग्रह

जलदपेयदिवासरपेतदासरसिवैरमतेजनतारसम्।

यवचणेक्षुनिवारसुशालिभिः सुखचयंसुलभंभुविवर्त्तेत्।।

मेघेश यानी कि वर्षा का स्वामी अर्थात मेघों का स्वामी सूर्य ग्रह होने पर जौ, गेहूं, चना, चावल, बाजरा, मूंग, आदि की पैदावार बढ़िया होती है। पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के सुख साधन, ऐश्वर्य और विविध प्रकार के साधनों का विस्तार होने की स्थिति बनती है। लेकिन, गुड़, शक्कर, दूध, चावल की पैदावार कम हो सकती है। कई स्थानों पर नदी-नालों में जल स्तर कम हो सकता है तथा वर्षा की कमी हो सकती है। जनता पाखंड, भय, ढोंग से परेशान हो सकती है।

वर्ष का रसेश शुक्र ग्रह

यजनयाजनकोत्सवकोत्सुकाजनपदाजलतोषितमानसाः।

सुखसुभिक्षसुमादवतीधराधरणिपा हतपापगणप्रियाः।।

नूतन संवत्सर का रसेश यदि शुक्र ग्रह हो, तो लोग यज्ञ और मांगलिक उत्सव करने में उत्सुकता दिखाते हैं। अनुकूल वर्षा होने से लोगों में संतुष्टि और प्रसन्नता का भाव बढ़ता है। पृथ्वी पर अच्छी फसल रहती है, सुख साधनों में बढ़ोतरी होती है और संपन्नता बढ़ती है। मौसमी फलों और कृषि आदि की पैदावार बढ़िया होती है। शासन-प्रशासन के लोग लोक कल्याण के कार्यों में अधिक दिलचस्पी दिखाते हैं।

वर्ष का नीरसेश बुध ग्रह

चित्रवस्त्रादिकंचैवशंखचन्दनपूर्वकम्।

अर्घवृद्धिःप्रजायेतनीरसेशोबुधोयदि।।

नीरसेश, जिसे ठोस धातु पदार्थों का स्वामी कहा जाता है, यदि बुध ग्रह हो तो विभिन्न रंगों के यानी कि रंग-बिरंगे सुंदर वस्त्र, चंदन, लकड़ी, हीरा, मोती, पुखराज, पन्ना और जवाहरात के भावों में तेजी देखने को मिलती है।  साथ ही, विभिन्न धातुओं जैसे कि सोना, चांदी, तांबा, लोहा आदि के भावों में भी विशेष तेजी दिखाई देती है।

वर्ष का फलेश शनि ग्रह

यदिशनिःफलपःफलहाभवेज्जनित पुष्पगणस्य दमःसदा।

हिमभयंवरतस्करजन्तुभीर्जनपदो गदराशिसमाकुलः।।

यदि वर्ष के फलों का स्वामी फलेश शनि ग्रह हो, तो फलदार वृक्षों पर फल और पुष्पों के उत्पादन में कमी की स्थिति बनती है। पहाड़ी क्षेत्रों में कहीं प्रतिकूल वर्षा होती है और कहीं असमय बाढ़ आदि आने के कारण हानि के योग बनते हैं। बेईमानी, चोरी, ठगी और भ्रष्टाचार की घटनाएं अधिक होती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में कहीं हिमपात, बर्फबारी से हानि हो सकती है। प्रदूषण, स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं और पेचीदा रोगों के कारण अधिकांश लोग दुखी रहते हैं तथा शहरों में जनसंख्या का दबाव बढ़ता है।

वर्ष का धनेश मंगल ग्रह

असममौल्यकरोधरणीसुतः शरदितांपकरस्तुषधान्यहृत्।

सहसिमासिभवेद्विगुणंतदानरपतिर्जनशोखविधायकः।।

वर्ष का धनेश यानी कि कोषाध्यक्ष यदि मंगल हो, तो उस नूतन वर्ष में थोक व्यापार की वस्तुओं के मूल्य में विशेष उतार-चढ़ाव के योग बनते हैं यानी व्यापार में अस्थिरता की संभावना बढ़ जाती है। शेयर बाजार में भी अस्थिरता का माहौल रहता है। माघ के महीने में वर्षा न होने और असमय या बेमौसम वर्षा होने के कारण गेहूं, आदि भूसे से प्राप्त होने वाले अनाजों का उत्पादन कम हो जाता है। समस्त देश में अनिश्चितता और अस्थिरता का माहौल रहने की स्थिति बनती है। शासन-प्रशासन की अधिकांश नीतियां आम जनमानस के दुखों और कष्टों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

वर्ष का दुर्गेश शनि ग्रह

रविसुतेगढ़पालिनिविग्रहे सकलदेशगताश्चलिताजनाः।

विविधवैरिविशेषितनागराः कृषिधनं शलभैर्भुषितंभुवि।।

दुर्गेश यानी सेनापति यदि शनि ग्रह हो, तो उस वर्ष अनेक देशों के बीच आंतरिक संघर्ष, दंगे-फसाद और युद्ध जैसे वातावरण से अराजकता फैलती है जिससे लोग आतंकित होकर अपना निवास स्थान छोड़कर दूसरी जगह पलायन करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। विभिन्न प्रांतों में सांप्रदायिक और जातीय झगड़ा-फसाद, टकराव की घटनाएं अधिक होती हैं तथा वातावरण अशांत हो जाता है। कुछ स्थानों पर विषाक्त कीटाणुओं, चूहों, टिड्डियों, अतिवृष्टि और अनावृष्टि, प्राकृतिक आपदाओं और प्रकोप से खड़ी फसलों को नुकसान होता है जिससे कृषि की भी स्थिति खराब होती है। ऐसा वर्ष के दौरान विशेषकर भाद्रपद और अश्विन मास में देखने को मिल सकता है।

स्वयं राजा स्वयं मंत्री जनेषु रोगपीड़ा चौराग्नि। 

शंका – विग्रह – भयं च नृपाणाम्।।

नव संवत्सर 2082 में राजा और मंत्री दोनों ही पद सूर्य देव को प्राप्त हुए हैं। यदि एक वर्ष में यह दोनों ही पद एक ही ग्रह को प्राप्त हो जाएं तो विभिन्न देशों के राजनेता निरंकुश हो सकते हैं। ऐसे में, मनमाना आचरण करने की स्थिति बनेगी और स्वार्थ पूर्ण करने के लिए कुछ भी करने को तत्पर रहेंगे। भूकंप, बाढ़, अग्निकांड, प्राकृतिक उपद्रव, प्रकोप तथा सांप्रदायिक हिंसा और जातीय उपद्रव अधिक होने के योग बन सकते हैं। वर्षा की कमी और उसके कारण जलवायु में गर्मी बढ़ने के योग बनेंगे तथा सर्दी कम रहेगी। लोगों में आवेश, क्रोध और उत्तेजना के कारण हिंसक घटनाएं अधिक हो सकती हैं। विपक्षी नेताओं और सत्ताधारी नेताओं के बीच टकराव और आरोप-प्रत्यारोप अधिक होने के योग बनेंगे। सब्जी, अनाज, फल और धान्य आदि की पैदावार कम हो सकती है। डकैती, चोरी, लूटमार, तस्करी, अग्निकांड और लोगों में गंभीर रोग, तनाव, आंखों से संबंधित तथा रक्त व पित्त से जुड़े रोग होने की संभावना बनेगी। अनाज में तेजी के कारण व्यापारी लोग इसका लाभ उठा सकते हैं।

इस प्रकार हमने नूतन संवत्सर 2082 के बारे में बहुत कुछ ऊपर जान लिया है। यदि इसकी संक्षेप में बात करें और उसके प्रभाव की बात करें, तो निम्नलिखित बातों को समझा जा सकता है: 

  • इस वर्ष में सिद्धार्थी नाम का संवत्सर होगा जिससे आम जनमानस में ज्ञान, वैराग्य जैसे विषयों में विशेष रूप से जिज्ञासा और रुचि बढ़ेगी। देश में धार्मिक आयोजनों में बढ़ोतरी होगी। 
  • संवत्सर के राजा और मंत्री दोनों ही मुख्य पदों पर सूर्य देव को अधिकार प्राप्त हुआ है जिससे समाज के लोगों में क्रोध और उत्तेजना बढ़ेगी। आवेश के कारण हिंसक घटनाएं और उपद्रव में अधिकता हो सकती है। 
  • सांप्रदायिक उपद्रव और कट्टरवाद की स्थिति अधिक होगी। लोगों के बीच नेत्र संबंधी गंभीर रोग, गंभीर समस्याएं और कलह जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
  • हिंदू नव वर्ष 2082 में सूर्य को तीन, शनि और बुध को दो-दो, चंद्र, शुक्र और मंगल को एक-एक पद प्राप्त हुए हैं।
  •  इस वर्ष क्रूर ग्रहों को छह पद और सौम्य ग्रहों को चार पद प्राप्त हुए हैं।
  • यदि राजनीतिक स्थिति को देखा जाए तो, इस वर्ष भारत में विशेष उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आपसी आरोप-प्रत्यारोप से राजनीतिक माहौल अत्यंत ही खराब हो जाएगा। कुछ नए गठबंधन होने की स्थिति बनेगी तथा सरकारी नीतियां और गतिविधियां काफी कठोर हो सकती हैं जिसके कारण आम जनता में असंतोष और भय उत्पन्न हो सकता है। 
  • इस वर्ष मार्च से जून और जुलाई से अक्टूबर के बीच खप्पर योग बनेगा जिससे किसी राज्य में सत्ता भंग होने, किसी प्रमुख नेता के पद से हट जाने या कष्टपूर्ण स्थिति के योग बन सकते हैं। प्राकृतिक प्रकोप में भी बढ़ोतरी हो सकती है तथा अग्निकांड, रेल दुर्घटना और तेल और गैस के दामों में भी तेजी आ सकती है।

हम आशा करते हैं कि हिन्दू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 2025 (नूतन संवत्सर 2082) आपके लिए अत्यंत ही शुभ और मंगलमय रहे तथा आपके जीवन में सब शुभ ही शुभ हो। हम आपके उज्जवल भविष्य की शुभकामना करते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 2025 में हिंदू नव वर्ष कब से शुरू होगा?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल हिंदू नव वर्ष का आरंभ 30 मार्च 2025, रविवार से होगा।

2. इस साल विक्रम संवत् के किस वर्ष का आरंभ होगा?

वर्ष 2025 में चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि से विक्रम संवत् 2082 की शुरुआत होगी। 

3. विक्रम संवत् 2082 का राजा कौन होगा?

संवत् 2082 के राजा सूर्य देव होंगे।