दुष्टों का संहार करने वाला है माँ कालरात्रि का स्वरूप, भय से मुक्ति के लिए लगाएं इस चीज़ का भोग !

दुष्टों का संहार करने वाला है माँ कालरात्रि का स्वरूप, भय से मुक्ति के लिए लगाएं इस चीज़ का भोग !

चैत्र नवरात्रि 2025: शक्ति साधना के पर्व नवरात्रि के 9 दिनों में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इसी क्रम में, चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता कालरात्रि की पूजा विधि-विधान से करने पर नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा सच्चे मन से करता है, उसके समस्त दुखों का अंत होता है। देवी कालरात्रि अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उन्हें शुभ फल प्रदान करती हैं इसलिए इनको शुभंकरी के नाम से भी जाना जाता है। एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि के बारे में समस्त जानकारी प्रदान करेगा। साथ ही, माँ कालरात्रि की पूजा विधि, प्रिय भोग और प्रिय रंग आदि के बारे में विस्तार से बात करेंगे। तो चलिए बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं सप्तमी तिथि के बारे में। 

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हम आपको ऊपर बता चुके हैं कि चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा का विधान है। शक्ति के सातवें स्वरूप देवी कालरात्रि को “कालों की काल” माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त देवी शक्ति का सानिध्य पाना चाहता है, उन्हें देवी की पूजा में उनकी प्रिय वस्तु का भोग लगाना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से माता प्रसन्न होकर आपके जीवन से हर संकट दूर कर देंगी। आइए चलिए अब नज़र डालते हैं चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि और पूजा मुहूर्त पर। 

चैत्र नवरात्रि 2025 सातवां दिन: तिथि और मुहूर्त 

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन माना जाता है। यह तिथि देवी दुर्गा की सातवीं शक्ति माता कालरात्रि को समर्पित है।  इस दिन भक्त मां की कृपा एवं आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रखकर देवी कालरात्रि की विधि पूर्वक आराधना करते हैं। साल 2025 में सप्तमी तिथि पर माता कालरात्रि की पूजा 04 अप्रैल 2025 को की जाएगी। अब हम जान लेते हैं सप्तमी तिथि पर देवी शक्ति की पूजा का मुहूर्त। 

चैत्र नवरात्रि 2025 का सातवां दिन: 04 अप्रैल 2025, शुक्रवार

सप्तमी तिथि का आरंभ: 03 अप्रैल की रात 09 बजकर 44 मिनट पर

सप्तमी तिथि की समाप्ति: 04 अप्रैल की रात 08 बजकर 15 मिनट तक 

नोट: उदया तिथि के अनुसार, चैत्र नवरात्रि सप्तमी तिथि 04 अप्रैल 2025 को होगी और इस दिन सप्तमी तिथि का व्रत किया जाएगा। 

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इस शुभ योग में रखा जाएगा सप्तमी तिथि का व्रत

वर्ष 2025 के चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि बेहद विशेष रहने वाली है क्योंकि नवरात्रि के सातवें दिन 04 अप्रैल 2025 को एक बेहद शुभ योग बनने जा रहा है। बता दें कि वैदिक ज्योतिष में शोभन योग को बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किया गया प्रत्येक कार्य फलदायी सिद्ध होता है। इसके अलावा, अगर आप शोभन योग में कोई जरूरी यात्रा करते हैं, तो वह यात्रा बेहद सुखद और आरामदायक रहती है। साथ ही, आपको शुभ परिणामों की प्राप्ति होती है।  शोभन योग 04 अप्रैल की रात 09 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। 

शनि देव को शांत करने के लिए करें कालरात्रि पूजन

देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप माता कालरात्रि का धार्मिक के साथ-साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी विशेष महत्व है। बात करें नवग्रहों की, तो नौ ग्रहों में सबसे क्रूर और पापी ग्रह माने जाने वाले शनि देव को देवी कालरात्रि नियंत्रित करती हैं। देवी के इस स्वरूप को माता पार्वती के समतुल्य माना गया है। ऐसे में, जो जातक अपने जीवन में शनि दोष या शनि ग्रह के नकारात्मक प्रभाव से जूझ रहा है, उन्हें नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर माँ कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना अवश्य करनी चाहिए। इसके अलावा, मां कालरात्रि की उपासना करने से भानु चक्र जागृत होता है और यह जातक के भीतर से हर तरह के भय का नाश कर देता है। ऐसे में, आपको जीवन की हर समस्या को समाधान करने का सामर्थ्य मिलता है। 

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कैसा है माँ कालरात्रि का स्वरूप?

माता कालरात्रि के स्वरूप के बारे में जानने से पहले हम बात करेंगे देवी के नाम के अर्थ की, तो बता दें कि देवी के नाम का शाब्दिक अर्थ अंधेरे को समाप्त करना है। इनके संबंध में कहा जाता जाता है कि जब किसी जातक के जीवन में निराशा अंधेरे के समान फैल जाए, तब देवी कालरात्रि की उपासना फलदायी सिद्ध होती है। 

बात करें देवी के स्वरूप की तो, सातवीं शक्ति माता कालरात्रि का वर्ण अंधकार के समान काला है और इनके बाल सदैव बिखरे और खुले रहते हैं। इनकी चार भुजाएँ हैं और यह अपने दाहिने हाथ में अभय और वर मुद्रा में हैं जबकि बाएं हाथों में तलवार और खड्ग ली हुई हैं। देवी ने अपने गले में एक चमकदार माला धारण की हुई है और इनके तीन नेत्र हैं। माता कालरात्रि के त्रिनेत्रों से तेज़ निकलता हैं। माँ की सवारी गधा है और इनका स्वरूप दिखने में बेहद भयानक है। लेकिन, माता अपने भक्तों को अपने रूप से एकदम विपरीत फल प्रदान करती हैं। 

क्यों की जाती है माँ कालरात्रि की पूजा?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर देवी कालरात्रि की उपासना करने से भक्त को विशेष सिद्धियों की प्राप्ति होती हैं। माता के इस स्वरूप की पूजा विशेष रूप से तंत्र-मंत्र के साधकों द्वारा की जाती है। कहते हैं कि इनकी पूजा करने से व्यक्ति के भय का नाश हो जाता है। साथ ही, यह अपने उपासक की अकाल मृत्यु से रक्षा करती हैं। जब किसी व्यक्ति के जीवन में शत्रु हावी होने लगते है, तब नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर माँ कालरात्रि की पूजा चमत्कार का काम करती है। देवी की कृपा से आपके शत्रु पराजित होते हैं। 

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चैत्र नवरात्रि 2025 सातवां दिन: माँ कालरात्रि पूजन विधि

चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि का पूजन सही विधि से करना चाहिए जो कि इस प्रकार हैं: 

  • सप्तमी तिथि पर प्रातःकाल उठकर स्नानादि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल या गोमूत्र छिड़कर पवित्र करें। 
  • ऐसा करने के पश्चात कलश स्थापना करके भगवान गणेश के पूजन के बाद पूजा शुरू करें। 
  • अब देवी कालरात्रि और सभी देवी-देवताओं की सप्तशती मंत्र से पूजा करें। 
  • माता को सौभाग्य सूत्र, वस्त्र, हल्दी, सिंदूर, चंदन, रोली, आभूषण, फूल, दूर्वा, बिल्वपत्र, दीप, नैवेद्य, माला, धूप, दक्षिणा, भोग, फल, पान आदि चढ़ाएं। 
  • माँ कालरात्रि के मंत्रों का स्पष्ट और उच्च स्वर में उच्चारण करते हुए जाप करें। 
  • इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
  • पूजा के अंत में देवी की आरती करें और जाने-अनजाने में भी हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें। साथ ही, देवी से अपनी  मनोकामना कहें। 

माँ कालरात्रि को लगाएं इसका भोग 

चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप माता कालरात्रि की पूजा करते समय उनका प्रिय भोग लगाना चाहिए जिससे आपको उनकी कृपा जल्द ही शीघ्र प्राप्त हो सके। देवी कालरात्रि को गुड़ अतिप्रिय है इसलिए सप्तमी तिथि पर देवी को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का प्रसाद के रूप में भोग लगाना चाहिए। आप अपनी इच्छा के अनुसार मालपुए का भोग भी लगा सकते हैं। 

कालरात्रि पूजन के लिए मंत्र

देवी कालरात्रि की पूजा करते समय सप्तमी तिथि पर निम्न मंत्रों से करें।

॥ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

मां कालरात्रि का स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

देवी स्त्रोत 

हीं कालरात्रि श्रीं कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥
कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥
क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

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सप्तमी तिथि पर करें ये उपाय, माँ कालरात्रि करेंगी हर संकट दूर

  1. जो जातक लंबे समय से बीमार चल रहे हैं या किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या से परेशान हैं, तो इससे छुटकरा पाने के लिए  चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि से शुरू करके अगले 42 दिनों तक ‘जय त्वं देवि‘ मंत्र का 108 बार जाप करें। मंत्र जाप करने के बाद आसमान की तरफ देखकर 11 बार कहें- ‘अच्युत, अनन्त, गोविन्द’ 
  2. यदि आपको बुरे सपने आते हैं या फिर आप सपनों से डर जाते हैं, तो सप्तमी तिथि पर एक गोमती चक्र लेकर ‘जय त्वं‘ मंत्र का 21 बार जाप करें। इसके बाद, गोमती चक्र को अपने  पलंग के पाये में चांदी के तार से बांध दें। इस उपाय को करने से बुरे सपने आने बंद हो जाएंगे।
  3.  जो लोग एक सुखी दांपत्य जीवन की चाह रखते हैं, वह चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर बेल के तीन पत्ते लेकर उस पर अपने पति या पत्नी का नाम गोरोचन का घोल बनाकर मोर पंख से लिखें और चांदी की एक डिब्बी में रखकर माता कालरात्रि के चरणों में रख दें।
  4. यदि आप जीवन में सभी कार्य अपने मन के अनुसार करना चाहते है, तो नवरात्रि पूजन के  बाद मां कालरात्रि का ध्यान करें और उनके 108 मंत्रों का जाप करें जो कि इस प्रकार है: “ॐ कालरात्र्यै नम:”

माँ कालरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथा 

धर्मग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार शुंभ और निशुंभ नामक दो राक्षसों ने देवलोक में आतंक मचाया हुआ था। उन्होंने युद्ध में इंद्रदेव को पराजित करके स्वर्गलोक पर कब्ज़ा कर लिया था। सभी देवता सहायता के लिए माँ पार्वती के पास गए, लेकिन उस समय देवी स्नान कर रहीं थीं इसलिए उन्होंने देवताओं की मदद के लिए चंडी को भेजा। देवी चंडी से युद्ध करने के लिए दानवों ने चण्ड-मुण्ड नाम के को दो राक्षसों को भेजा। 

उस समय देवी ने माँ कालरात्रि को प्रकट किया और उन्होंने चण्ड-मुण्ड का वध कर दिया। इसके बाद, माँ से लड़ने रक्तबीज नामक राक्षस आया और युद्ध के समय उसके शरीर से गिर रही रक्त की बूंदों से नए राक्षस पैदा हो रहे थे, तब देवी ने उसके रक्त की बूँदें  धरती पर गिरने से रोकने के लिए रक्त पीने का विचार किया जिससे न उसका खून ज़मीन पर गिरे और न ही कोई नया राक्षस  पैदा हो। 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 2025 में चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि कब है?

चैत्र नवरात्रि में सप्तमी तिथि 04 अप्रैल 2025 को होगी।

2. सप्तमी तिथि पर किस स्वरूप की पूजा की जाती है?

माँ कालरात्रि की पूजा सप्तमी तिथि पर की जाती है। 

3. माँ कालरात्रि कौन सी शक्ति है?

देवी दुर्गा की सातवीं शक्ति माँ कालरात्रि हैं।