आमलकी एकादशी 2025: प्रत्येक वर्ष में 24 एकादशियां होती हैं और हर माह दो एकादशी आती हैं। हर महीने में आने वाली प्रत्येक एकादशी का अपना एक अलग महत्व होता है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पड़ने वाली एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

मान्यता है कि इस एकादशी पर स्वयं भगवान विष्णु मां लक्ष्मी के साथ आंवले के वृक्ष पर वास करते हैं। एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्लॉग में हम आपको आमलकी एकादशी 2025 के बारे में बताएंगे और साथ ही इस बारे में भी चर्चा करेंगे कि इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए आप अपनी राशि के अनुसार क्या उपाय कर सकते हैं। तो आइए बिना देरी किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं विस्तार से आमलकी एकादशी व्रत 2025 के बारे में।
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आमलकी एकादशी 2025: तिथि व मुहूर्त
इस बार 10 मार्च को आमलकी एकादशी पड़ रही है। 09 मार्च को सुबह 07 बजकर 47 मिनट पर एकादशी तिथि आरंभ होगी। 10 मार्च को सुबह 07 बजकर 47 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त होगी।
पारण का समय: 11 मार्च को 06 बजकर 36 मिनट से लेकर 08 बजकर 58 मिनट तक।
अवधि : 2 घंटे 22 मिनट।
आमलकी एकादशी 2025 का महत्व
हिंदू धर्म में आमलकी एकादशी का बहुत महत्व है। मान्यता है कि इस एकादशी का संबंध आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति से होता है। सनातन धर्म के अनुसार आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा करने से घर में सुख-संपत्ति और खुशियां आती हैं। जो व्यक्ति इस एकादशी पर व्रत एवं पूजन करता है, उसे अपने पिछले जन्म के पाप कर्मों से मुक्ति मिल जाती है।
आमलकी एकादशी पर आंवले के पेड़ की पूजा करने के अलावा आंवले का पौधा लगाने और इसका दान करने का भी बहुत महत्व है। ऐसा करने से जातक को धन, संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ऐसा भी कहा जाता है इस एकादशी तिथि पर आंवले का उबटन शरीर पर लगाना चाहिए और आंवले के पानी से नहाना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
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आमलकी एकादशी 2025 की पूजन विधि
आमलकी एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। अब भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें और फिर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें। आमलकी एकादशी 2025 पर विष्णु जी का पूजन करने के लिए आपको पीले रंग के फूल, माला, पीला चंदन, भोग के रूप में मिठाई चाहिए होगी। ये सभी चीज़ें भगवान विष्णु को अर्पित करें और इसके साथ ही, तुलसी ज़रूर अर्पित करें क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय हैं।
अब आप घी का दीपक और धूप जलाकर एकादशी व्रत कथा, चालीसा आदि का पाठ करें। दिनभर व्रत रखने के बाद दूसरे दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।
आमलकी एकादशी पर कैसे करें आंवले के पेड़ की पूजा
आमलकी एकादशी 2025 पर आंवले के पेड़ की पूजा करने से भी सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सबसे पहले तो पेड़ की चारों तरफ से अच्छे से सफाई कर लें। अब आप पेड़ के नीचे सफेद रंग की रंगोली बनाएं और उसमें एक पानी भरा हुआ कलश स्थापित कर दें। इसके बाद आप कलश के कंठ में श्रीखंड चंदन का लेप लगाएं। आंख बंद करके कलश में सभी देवी-देवताओं, तीर्थों और सागर को आमंत्रित करें।
इसके बाद कलश में इत्र और पंचरत्न रखें और फिर इस पर मिट्टी का ढक्कन रख दें। इसके ऊपर एक घी का दीपक जलाएं। अब आप कलश के ऊपर पीले रंग का वस्त्र डालें और फिर पूरे विधि-विधान से पूजा करें। द्वादश तिथि को ब्राह्मणों को विधिवत भोजन कराने के बाद दक्षिणा आदि के साथ ही कलश भी दे दें। इसके बाद ही व्रत का पारण करना चाहिए।
आमलकी एकादशी की व्रत कथा
आमलकी एकादशी 2025 कथा की बात करें, तो पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वैदिश नाम का एक नगर था और उस नगर में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र रहते थे। वहां रहने वाले सभी लोग भगवान विष्णु के भक्त थे और सब उनकी पूजा में लीन रहते थे। वैदिश नगर के राजा चैतरथ बहुत बड़े विद्वान और धार्मिक व्यक्ति थे। उनके नगर में कोई भी व्यक्ति गरीब नहीं था।
नगर में रहने वाला हर शख्स साल में पड़ने वाली सभी एकादशी का व्रत करता था। एक बार फाल्गुन महीने में आमलकी एकादशी आई। सभी नगरवासी और राजा ने यह व्रत किया और मंदिर जाकर आंवले के पेड़ की पूजा की और वहीं पर पूरी रात जागरण किया। तभी उस रात एक बहेलिया वहां पहुंचा जो बहुत ही पापी था और वह बहुत अधिक भूखा व प्यासा था। भूख की तलाश में वह मंदिर पहुंचा और मंदिर के कोने में बैठकर जागरण को देखने लगा। साथ ही, सबके साथ विष्णु भगवान व एकादशी महात्म्य की कथा सुनने लगा। इस तरह पूरी रात बीत गई।
नगर वासियों के साथ बहेलिया भी पूरी रात जागा रहा। सुबह होने पर सभी नगरवासी अपने घर चले गए। बहेलिया ने भी घर जाकर भोजन किया। लेकिन कुछ समय के बाद बहेलिया की मौत हो गई। हालांकि, उसने आमलकी एकादशी व्रत कथा सुनी थी और जागरण भी किया था, जिसके चलते उसका अगला जन्म राजा विदूरथ के घर हुआ। राजा ने उसका नाम वसुरथ रखा। बड़ा होकर वह नगर का राजा बना। एक दिन वह शिकार पर निकला, लेकिन बीच में ही रास्ता भूल गया। रास्ता भूल जाने के कारण वह एक पेड़ के नीचे सो गया। थोड़ी देर बाद वहीं म्लेच्छ आ गए और राजा को अकेला देखकर उसे मारने की योजना बनाने लगे। उन्होंने कहा कि इसी राजा के कारण उन्हें देश निकाला दिया गया। इसलिए इसे हमें मार देना चाहिए। इस बात से अनजान राजा सोता रहा। म्लेच्छों ने राजा पर हथियार फेंकना शुरू कर दिया। लेकिन उनके शस्त्र राजा पर फूल बनकर गिरने लगे।
कुछ देर के बाद सभी म्लेच्छ जमीन पर मृत पड़े थे। वहीं जब राजा की नींद खुली तो उन्होंने देखा कि कुछ लोग जमीन पर मृत पड़े हैं। राजा समझ गया कि वह सभी उसे मारने के लिए आए थे, लेकिन किसी ने उन्हें ही मौत के घाट उतार दिया। यह देखकर राजा ने सोचा कि जंगल में आखिर कौन उसकी जान बचा सकता है। तभी आकाशवाणी हुई कि ‘हे राजन भगवान विष्णु ने तुम्हारी जान बचाई है। तुमने पिछले जन्म में आमलकी एकादशी व्रत कथा सुनी था और उसी का फल है कि आज तुम्हारे शत्रु तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाए। इसके बाद राजा ने भी विधि-विधान से एकादशी का व्रत करना शुरू कर दिया।
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आमलकी एकादशी 2025 पर करें ये ज्योतिषीय उपाय
आप आमलकी एकादशी पर अपनी समस्या एवं मनोकामना के अनुसार निम्न उपाय कर सकते हैं:
- यदि आप संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं, तो आमलकी एकादशी पर 11 छोटे बच्चों को आंवले की कैंडी या आंवले का मुरब्बा खाने को दें। आप मंदिर में भी आंवले की कैंडी या मुरब्बे का एक पैकेट दान या भेंट करें।
- जीवन में सफलता पाने की कामना के लिए आप आमलकी एकादशी पर 21 ताज़ा पीले रंग के फूल लें और उनकी माला बनाकर भगवान विष्णु को अर्पित करें। भगवान विष्णु को खोए से बनी मिठाई का भोग भी लगाएं।
- अगर किसी की शादी नहीं हो पा रही है या मनचाहा जीवनसाथी नहीं मिल पा रहा है, तो वह व्यक्ति आमलकी एकादशी पर विष्णु जी का पूजन करे और उन्हें आंवला अर्पित करें।
- जो जातक अपने जीवन में सुख-समृद्धि और संपन्नता की कामना रखते हैं, वे आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु का पूजन करें। इसके बाद एकाक्षी नारियल को पीले रंग के वस्त्र में बांधकर अपने पास या तिजोरी में रख लें।
- करियर में सफलता पाने या अपने प्रतिद्वंदियों को परास्त करने के लिए आप आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष में जल चढ़ाएं। इस पेड़ की जड़ से थोड़ी मिट्टी लेकर अपने माथे पर तिलक लगा लें। आपकी मनोकामना ज़रूर पूरी होगी।
- परिवार में अशांति या लड़ाई-झगड़ा रहता है, तो इस समस्या से निजात पाने के लिए आप आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु के मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मंत्र है – ॐ नमो भगवते नारायणाय।
- जिन लोगों का स्वास्थ्य खराब रहता है या जो अपनी सेहत में सुधार लाना चाहते हैं, वे आमलकी एकादशी 2025 पर आंवले के वृक्ष की पूजा करें और इस दिन आंवले का फल खाएं।
- जो छात्र पढ़ाई में कमज़ोर हैं या किसी परीक्षा में सफलता पाना चाहते हैं, वे आमलकी एकादशी पर दूध में केसर और चीनी डालकर विष्णु जी को भोग लगाएं। छात्र भगवान विष्णु का आशीर्वाद लेकर विद्या यंत्र भी धारण कर सकते हैं।
- व्यापारी अपने बिज़नेस को बढ़ाने और अधिक मुनाफा कमाने के लिए आमलकी एकादशी पर आंवले का वृक्ष लगाएं और पूरे एक महीने तक लगातार उसकी देखभाल करें।
- नौकरी बदलना चाहते हैं लेकिन कोई अच्छा अवसर नहीं मिल पा रहा है, तो आप आमलकी एकादशी 2025 पर दामोदर मंत्र – ‘ॐ दामोदराय नम:’ का 108 बार जाप करें।
- शत्रुओं पर विजय पाने की कामना से आप आमलकी एकादशी पर ब्राह्मण को पीले रंग के वस्त्र भेंट कर सकते हैं।
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आमलकी एकादशी पर राशि अनुसार उपाय
इस आमलकी एकादशी पर आप अपनी राशि के अनुसार निम्न उपाय कर सकते हैं:
- मेष राशि: आप लाल रंग के पुष्पों से भगवान विष्णु की उपासना करें। इसके अलावा गाय के घी का दीपक जलाएं। इससे आपके धन में वृद्धि होगी।
- वृषभ राशि: आप आंवले के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाएं। इसके अलावा आप दूध और मिठाई का दान करें।
- मिथुन राशि: अगर आपकी मिथुन राशि है, तो आप विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। आप हरे रंग के वस्त्र पहनें और हरा चना दान करें।
- कर्क राशि: इस राशि वाले जल में दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। आप शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल भी चढ़ा सकते हैं।
- सिंह राशि: आप आंवले के पेड़ की पूजा कर के उसकी परिक्रमा करें। आप तांबे के पात्र में जल भरकर भगवान विष्णु को अर्पित करें।
- कन्या राशि: भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते और पीले रंग की मिठाई चढ़ाएं। आप आमलकी एकादशी 2025 पर गरीबों को खिचड़ी दान करें।
- तुला राशि: आप मां लक्ष्मी की पूजा करें और उन्हें कमल का पुष्प अर्पित करें। तुला राशि वाले धूप या अगरबत्ती जलाकर भगवान विष्णु की उपासना करें।
- वृश्चिक राशि: आप गरीब को गुड़ और तिल का दान करें। आप लाल रंग के वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु को लाल रंग के पुष्प अर्पित करें।
- धनु राशि: आप आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। इस दिन आप चने की दाल और गुड़ का दान भी करें।
- मकर राशि: आप शनि देव की उपासना करें और भगवान विष्णु को नीले रंग के फूल अर्पित करें। मकर राशि वाले भगवान विष्णु को काले तिल चढ़ाएं।
- कुंभ राशि: आप जल में तिल मिलाकर भगवान विष्णु को अर्घ्य दें। आप गरीबों को तिल-गुड़ और कंबल का दान करें।
- मीन राशि: इस राशि वाले भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें और हल्दी का तिलक लगाएं। आप गरीब लोगों को पीली मिठाई और फल दान में दें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर. इस दिन भगवान विष्णु एवं आवंले के पेड़ की पूजा की जाती है।
उत्तर. इस दिन भगवान विष्णु को आंवले का भोग लगाना चाहिए।
उत्तर. शाम को सूर्यास्त से पहले फलों का सेवन किया जाता है।