दुखों, कष्टों एवं विवाह में आ रही बाधाओं के अंत के लिए षष्ठी तिथि पर जरूर करें कात्यायनी पूजन!

दुखों, कष्टों एवं विवाह में आ रही बाधाओं के अंत के लिए षष्ठी तिथि पर जरूर करें कात्यायनी पूजन!

चैत्र नवरात्रि 2025: देवी दुर्गा की शक्ति साधना का सबसे बड़ा पर्व चैत्र नवरात्रि का आगमन हो चुका है और आज नवरात्रि के छठे दिन माता शक्ति के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाती है। वैसे तो, नवरात्रि के नौ दिनों में से प्रत्येक दिन का अपना अलग महत्व है और इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अलग-अलग समस्याओं के निवारण के लिए की जाती हैं। माता भक्त को मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद देती हैं। हम इस विशेष ब्लॉग में आपको चैत्र नवरात्रि के छठे दिन यानी कि षष्ठी तिथि के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे। इस दिन देवी के किस स्वरूप की पूजा की जाती है? माता को प्रसाद के रूप में किस चीज़ का भोग लगाना चाहिए? किस मंत्र का जाप करना चाहिए और क्या है छठे नवरात्रि की पौराणिक कथा आदि के बारे में हम विस्तार से बात करेंगे। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और शुरुआत करते हैं चैत्र नवरात्रि के छठे दिन के बारे में।

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चैत्र नवरात्रि का छठा दिन देवी कात्यायनी को समर्पित होता है। इस दिन देवी दुर्गा के छठे स्वरूप की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि कात्यायनी पूजन से जातक को सुख-समृद्धि, आयु और वैभव का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही, छठे दिन माँ कात्यायनी का व्रत और पूजन अविवाहितों के लिए विशेष रूप से फलदायी होता है क्योंकि माता की कृपा से भक्त को मनचाहा वर प्राप्त होता है। 

यदि आप भी माता कात्यायनी से मनचाहा वर या कोई आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो आपको छठे दिन देवी की पूजा विधि-विधान, प्रिय भोग, प्रिय रंग, कथा, पुष्प, मंत्र और आरती के माध्यम से करनी चाहिए। इनका सानिध्य आपको जीवन में शक्ति और निडरता प्रदान करता है। 

चैत्र नवरात्रि 2025 छठा दिन: तिथि एवं शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। चैत्र मा​ह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि नवरात्रि का छठा दिन होता है और इस दिन देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी आराधना से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस साल चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में से एक नवरात्रि कम होने के कारण छठा दिन यानी षष्ठी तिथि 03 अप्रैल 2025, गुरुवार को पड़ेगी। इस दिन ही भक्तों द्वारा छठे नवरात्रि का व्रत किया जाएगा। आइए अब नज़र डालते हैं छठे नवरात्रि के पूजा मुहूर्त पर। 

चैत्र नवरात्रि 2025 का छठा दिन: 03 अप्रैल 2025, गुरुवार

षष्ठी तिथि का आरंभ: 02 अप्रैल की रात 11 बजकर 52 मिनट पर

षष्ठी तिथि की समाप्ति: 03 अप्रैल की रात 09 बजकर 44 मिनट तक

नोट: उदया तिथि के अनुसार, चैत्र नवरात्रि की षष्ठी तिथि का व्रत 03 अप्रैल 2025 को किया जाएगा।    

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छठे नवरात्रि पर बनेगा ये शुभ योग

चैत्र नवरात्रि के छठे दिन अर्थात षष्ठी तिथि पर एक बेहद शुभ योग बनने जा रहा है। इस तिथि पर सौभाग्य योग निर्मित हो रहा है जो इस तिथि की रात के 12 बजे तक रहेगा। ज्योतिष में सौभाग्य योग में की गई पूजा और कार्यों से सफलता, सुख, ऐश्वर्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। बता दें कि सौभाग्य योग के स्वामी भगवान ब्रह्मा हैं और यह योग व्यक्ति के जीवन में समृद्धि और भाग्य को दर्शाता है।

देवी कात्यायनी का ज्योतिषीय महत्व 

सनातन धर्म में माता कात्यायनी को विशेष स्थान प्राप्त है। लेकिन, शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि माता कात्यायनी को ज्योतिष में भी महत्वपूर्ण माना गया है। ज्योतिष की बात करें तो, देवताओं के गुरु बृहस्पति देव से देवी कात्यायनी संबंधित हैं। माता ही गुरु ग्रह को नियंत्रित करती हैं इसलिए इनकी पूजा से गुरु ग्रह के अशुभ प्रभावों को दूर किया जा सकता है। सामान्य शब्दों में कहें तो, माता कात्यायनी की पूजा उन लोगों के लिए शुभ रहती है जो कुंडली में कमज़ोर बृहस्पति से परेशान हैं। चलिए अब जानते हैं माता दुर्गा के छठे स्वरूप कात्यायनी के बारे में विस्तार से।

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कैसा है माँ कात्यायनी का स्वरूप?

हम आपको बता चुके हैं कि देवी दुर्गा की छठी शक्ति मां कात्यायनी हैं और चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। माता शक्ति ने देवी कात्यायनी का अवतार महिषासुर राक्षस का वध करने के लिए लिया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी के इस स्वरूप को काफी हिंसक माना जाता है और इस वजह से देवी कात्यायनी “युद्ध की देवी” के नाम से भी जानी जाती हैं। 

माता कात्यायनी को अमोघ फलदायिनी माना गया है और इनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और भव्य है। बात करें इनके वर्ण की, तो देवी का वर्ण स्वर्ण की तरह चमकीला और उज्जवल है। मां दुर्गा के छठे स्वरूप कात्यायनी देवी की सवारी शेर हैं और इनकी चार भुजाएं हैं। यह अपने बाएं हाथों में कमल और तलवार धारण किए हुए है जबकि दाहिने हाथ वरद और अभय मुद्रा में हैं। देवी कात्यायनी ने लाल रंग के वस्त्र धारण किए हुए हैं जिसमें उनका स्वरूप अत्यंत सुंदर और मनोहर लगता है। कहते हैं कि ब्रज की गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति के लिए कालिंदी नदी के किनारे देवी कात्यायनी की पूजा की थी इसलिए इनको ब्रज की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।

क्यों की जाती है माता कात्यायनी की पूजा?

चैत्र नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर मां दुर्गा के छठे स्वरूप कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनका यह स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य माना जाता है। ऐसा कहते हैं कि नवरात्रि के पावन दिनों में मां कात्यायनी की पूजा और व्रत करने से भक्त को अर्थ, धर्म, मोक्ष और काम इन सभी की प्राप्ति होती है। साथ ही, देवी के आपसे प्रसन्न होने पर जातक संसार में सभी तरह के सुखों का आनंद लेते हुए मोक्ष को प्राप्त हो जाता है। इनकी कृपा से आपके जीवन से सभी कष्टों और दुखों का अंत होता है।

भागवत पुराण में वर्णन किया गया है कि माँ कात्यायनी की पूजा-अर्चना करने से जातक का शरीर कांतिमान हो जाता है। वहीं, गृहस्थ लोगों को माता की आराधना से सुखमय जीवन की प्राप्ति होती है। साथ ही, इनके आशीर्वाद से रोग, शोक, भय और संताप आदि का नाश हो जाता है।

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चैत्र नवरात्रि 2025 छठा दिन: माँ कात्यायनी पूजन विधि

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से शुभ फलों की प्राप्ति तब ही होती है, जब पूजा विधि-विधान से की जाती है इसलिए यहाँ हम आपको चैत्र नवरात्रि के छठे दिन कात्यायनी पूजा की सही विधि प्रदान कर रहे हैं।   

  • षष्ठी तिथि पर प्रातःकाल स्नानादि से निवृत होने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें। 
  • इसके बाद सच्चे मन से देवी का स्मरण करने के पश्चात मां कात्यायनी की पूजा शुरू करें। 
  • देवी कात्यायनी का जल से अभिषेक करें और फिर लगातार मंत्रोच्चार करते हुए देवी को लाल रंग के फूल, अक्षत्, लाल चुनरी, सिंदूर, धूप, फल, शहद और दीप आदि अर्पित करें। 
  • इसके पश्चात माता कात्यायनी के बीज मंत्र का जाप करें और फिर कथा का पाठ करें। 
  • सबसे अंत में आरती करें और अपनी मनोकामना माता के सामने प्रकट करते हुए उसे पूरा करने की प्रार्थना करें। 

माता कात्यायनी को अति प्रिय हैं ये भोग

मां कात्यायनी को सफलता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है और इनकी कृपा आपको जीवन में अपार सफलता दिलाने का सामर्थ्य रखती है। इस प्रकार, चैत्र नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा करते समय देवी को शहद का भोग लगाना चाहिए क्योंकि उन्हें शहद अति प्रिय है। मान्यता है कि माता को शहद का भोग लगाने से उपासक के व्यक्तित्व में निखार आता है। हालांकि, अगर आप चाहें तो, देवी को प्रसाद के रूप में लौकी और मीठा पान भी अर्पित कर सकते हैं।

देवी कात्यायनी की पूजा के लिए मंत्र

माता कात्यायनी की पूजा छठे नवरात्रि के दिन निम्न मंत्रों से करें। 

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

प्रार्थना मंत्र

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

देवी की स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

विवाह में देरी होने पर अवश्य करें कात्यायनी पूजा 

चैत्र नवरात्रि के छठे दिन कात्यायनी पूजा को करना उन लोगों के लिए विशेष रूप से फलदायी साबित होता है जिन जातकों के विवाह में बार-बार समस्या आ रही है, विवाह में देरी हो रही है या विवाह से जुड़े मामलों में अड़चनें या रुकावटें पैदा हो रही हैं। ऐसे जातकों को कात्यायनी पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और विवाह के मार्ग में आ रही सभी तरह की समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही, कन्याओं को कात्यायनी पूजन करने से मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। 

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चैत्र नवरात्रि के छठे दिन पर करें ये उपाय, माँ कात्यायनी का मिलेगा आशीर्वाद 

  1. जिन कन्याओं के विवाह में समस्या आ रही है, उन्हें छठे नवरात्रि के दिन मां कात्यायनी के मंत्र ‘ऊँ क्लीं कात्यायनी महामाया महायोगिन्य घीश्वरी, नन्द गोप सुतं देवि पतिं मे कुरुते नमः।।’ का 11 बार जाप करना चाहिए। ऐसा करने से कन्या के विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं। 
  2. यदि आपके ऊपर कर्ज़ बहुत हैं और लाख प्रयास करने के बाद भी आप कर्ज़ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं, तो आप आटे में शक्कर मिलाकर चींटीयों को डालें या फिर पंजीरी को किसी पेड़ के नीचे डालें जहां पर चींटियों का बिल बने हुए हों। नवरात्रि के दौरान इस उपाय को करने से जातक को कर्ज़ से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही, भविष्य में आपको कर्ज़ लेने की नौबत नहीं आती है। 
  3. नवरात्रि के छठे दिन स्नान करने के बाद आप साबुत फिटकरी का एक टुकड़ा (कम से कम 50 ग्राम) लें और इसकी काले कपड़े में सिलाई करके घर या व्यापार के मुख्य द्वार पर लटका दें। इस उपाय को करने से धन प्राप्ति के नए रास्ते खुलते हैं और घर में बरकत बनी रहती है। यदि आप फटकरी को टांग न सकें, तो फिटकरी को काले कपड़े में बांधकर घर में ही रखें। 

देवी कात्यायनी से जुड़ी पौराणिक कथा

धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार महर्षि कात्यायन ने कठोर तपस्या की थी और उनकी इस तपस्या का उद्देश्य संतान प्राप्ति था। उस समय माता शक्ति ने महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर उनको दर्शन दिए और माता के सामने उन्होंने अपनी संतान प्राप्ति की इच्छा प्रकट की। इसके पश्चात माता ने ऋषि को वचन दिया और कहा, शीघ्र ही वह पुत्री के रूप में उनके घर में जन्म लेंगी। माता के वचन देने के कुछ समय पश्चात बाद तीनों लोको में महिषासुर नामक राक्षस ने आंतक मचाया हुआ था। वह लोगों पर अत्याचार करने लगा और यह अत्याचार हर दिन के साथ बढ़ते जा रहे थे।

महिषासुर के आतंक की वजह से मानव से लेकर देवी-देवता तक परेशान थे और भयभीत होकर जीवन जी रहे थे। यह सब देखकर ब्रह्मा जी, विष्णु जी और शिव जी ने अपने तेज से एक देवी को प्रकट किया और इन्होने ही महर्षि कात्यायन के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। महर्षि कात्यायन के घर में देवी का जन्म होने के कारण ही इनका नाम कात्यायनी पड़ा। ऋषि कात्यायन ने अपने घर में पुत्री का जन्म होने के बाद देवी कात्यायनी की सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि पर विधि-विधान से पूजा की थी। इन तीन दिनों के बाद दशमी तिथि पर देवी कात्यायनी ने महिषासुर का वध करके तीनों लोकों को उसके अत्याचार से मुक्त दिला दी थी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. चैत्र नवरात्रि के छठे दिन देवी के किस स्वरूप की पूजा की जाती है?

चैत्र नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर माँ कात्यायनी की पूजा का विधान है।

2. कात्यायनी पूजा किसे करनी चाहिए?

जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है, उनके लिए कात्यायनी पूजा करना शुभ रहता है। 

3. साल 2025 में चैत्र नवरात्रि कितने दिन के होंगे?

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 8 दिन के होंगे।