मंगल का कर्क राशि में गोचर: हम सभी इस बात को भली-भांति जानते हैं कि वैदिक ज्योतिष में नवग्रहों में मंगल देव को सबसे उग्र ग्रह माना जाता है। यह हर इंसान के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं क्योंकि मंगल ग्रह का संबंध मनोकामनाओं, पराक्रम और जुनून आदि से है। वैसे मंगल को अनेक नामों से जाना जाता है और उनके कुछ नामों में ‘कुजा’,‘लोहिता’ और ‘भौम पुत्र’ शामिल हैं। लोहिता का अर्थ लाल रंग से है। बता दें कि अब जल्द ही मंगल ग्रह अपनी राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं और वह कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्लॉग में आपको “मंगल का कर्क राशि में गोचर से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी जैसे कि तिथि, समय, प्रभाव आदि।
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ऐसे में, आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि मंगल का यह गोचर आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा? किन राशियों को मिलेंगे शुभ परिणाम और किसे अशुभ? क्या मिलेगी आपको मनचाही नौकरी या फिर करना होगा इंतज़ार? प्रेम, विवाह और वैवाहिक जीवन का हाल? इन सभी सवालों के जवाब आपको हमारे इस लेख में मिलेंगे। साथ ही, मंगल का कर्क राशि में गोचर सभी राशियों के साथ-साथ देश-दुनिया को भी प्रभावित करेगा। यहां हम आपको इस गोचर के प्रभाव और कुंडली में मंगल देव को मज़बूत करने के उपाय भी प्रदान करेंगे। तो चलिए शुरुआत करते हैं इस ब्लॉग की और जानते हैं मंगल गोचर की तिथि और समय।
मंगल का कर्क राशि में गोचर: तिथि और समय
साहस एवं पराक्रम के ग्रह कहे जाने वाले मंगल महाराज उग्र प्रवृत्ति के माने जाते हैं जो लगभग हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। अब मंगल महाराज 03 अप्रैल 2025 की रात 01 बजकर 32 मिनट पर कर्क राशि में गोचर करने जा रहे हैं। बता दें कि कर्क राशि में मंगल नीच के होते हैं और इस राशि के अधिपति देव चंद्रमा हैं। इसकी परिणामस्वरूप, मंगल की स्थिति कर्क राशि में कमज़ोर होती है इसलिए इस गोचर को ज्यादा अच्छा नहीं कहा जा सकता है। ऐसे में, मंगल का गोचर कुछ राशियों के लिए अच्छा रह सकता है जबकि कुछ राशियों के लिए नकारात्मक रह सकता है। आइए अब हम नज़र डालते हैं मंगल ग्रह के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व पर।
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मंगल ग्रह का धार्मिक महत्व
- बात करें मंगल ग्रह के धार्मिक महत्व की, तो हिंदू धर्म में मंगल का अर्थ ‘पवित्र और शुभ’ से है इसलिए मंगल देव को समर्पित मंगलवार के दिन नए काम को शुरू करना शुभ माना जाता है।
- बता दें कि मंगलवार का नाम ‘मंगल’ ग्रह के नाम पर ही पड़ा है और इसका अर्थ कुशल होता है। इसके अलावा, मंगल देव का संबंध संकटमोचन हनुमान से भी माना गया है।
- हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं में मंगल को पृथ्वी का पुत्र कहा गया है इसलिए यह भौम पुत्र के नाम से भी जाने जाते हैं।
- शिव पुराण के अनुसार, मंगल देव का जन्म भगवान शिव की पसीने की बूंद से हुआ था और इसके बाद देवता बन कर आकाश में स्थापित हो गए थे।
- पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, एक बार भगवान शिव का युद्ध अंधकासुर नामक दैत्य से चल रहा था और इस दौरान महादेव के मस्तक से पीसना भूमि पर गिरा। इस पसीने की बूँद से भूमि के गर्भ से एक अंगार क्षीण लिंग उत्पन्न हुआ जिससे एक बालक प्रकट हुआ। इस बालक ने अंधकासुर का वध किया और शिव जी की कृपा से यह बालक अंतरिक्ष में ग्रह के रूप में स्थापित हुआ और इसे ही मंगल ग्रह के नाम से जाना गया।
मंगल ग्रह का ज्योतिषीय महत्व
- हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि ज्योतिष शास्त्र में मंगल को उग्र स्वभाव का ग्रह माना गया है। साथ ही, यह युद्ध के देवता और सेनापति के नाम से भी प्रसिद्ध हैं।
- मंगल एक पुरुष प्रधान ग्रह है और इन्हें अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।
- मनुष्य जीवन में मंगल देव भाई, भूमि और ऊर्जा से जुड़े हुए हैं। साथ ही, यह व्यक्ति के भीतर ऊर्जा में वृद्धि करते हैं और इनके प्रभाव से इंसान अपने कार्य को पूरी ऊर्जा, शक्ति और क्षमता के साथ करता है।
- यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल की स्थिति मज़बूत या शुभ होती है, तो वह निडरता और साहस से पूर्ण रहता है। ऐसे में, आप अपने शत्रुओं को पराजित करने में सक्षम होते हैं। इसके अलावा, मंगल ग्रह से ही कुंडली में मंगल दोष जन्म लेता है।
कुंडली में मंगल दोष होने पर जातक का वैवाहिक जीवन भी प्रभावित होता है और उसे नीचे दी गई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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वैवाहिक जीवन पर मंगल दोष का प्रभाव
कुंडली में मंगल दोष होने पर जातक का वैवाहिक जीवन नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है। वहीं, अविवाहित जातकों को विवाह में देरी और अनेक तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता हैं। अगर आप पहले से शादीशुदा हैं, तो जातक को पार्टनर के साथ आपसी तालमेल बिठाने में परेशानी का अनुभव होता है।
ज्योतिष शास्त्र में वर्णित है कि कुंडली का सातवां भाव विवाह और वैवाहिक जीवन का होता है। इस प्रकार, मंगल की सातवें भाव में उपस्थिति अशुभ होती है। इस संबंध में ज्योतिषियों का मत है कि मंगल, शनि, राहु या केतु, सूर्य जैसे अशुभ ग्रह या पीड़ित चंद्रमा सातवें भाव में बैठे होते हैं या इस भाव को देख रहे होते हैं, तो यह जातक के विवाह में देरी का कारण बनते हैं। अगर शनि और चंद्रमा किसी भाव में एक साथ बैठे होते हैं, तब भी विवाह में देरी होती है।
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मांगलिक दोष के लक्षण
कुंडली में मंगल दोष होने पर आप नीचे दिए गए संकेतों से इसकी पहचान कर सकते हैं जो कि इस प्रकार हैं:
- मुकदमे में फंस जाना
- आत्मविश्वास और साहस की कमी
- संपत्ति को लेकर विवाद पैदा होना
- रक्त से जुड़ी समस्याएं एवं रोगों की चपेट में आना
- वैवाहिक जीवन में मतभेद एवं समस्याएं आना
- भाई के साथ विवादों का बने रहना
- व्यक्ति पर हिंसक स्वभाव हावी होना
- कर्जे की स्थिति में आ जाना
मांगलिक दोष को दूर करने के उपाय
मंगल दोष को शांत करने के लिए आप इन उपायों को अपना सकते हैं।
- मंगलवार के दिन उपवास करें और हनुमान मंदिर जाकर बूंदी के प्रसाद का वितरण करें।
- मंगलवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।
- मंगलवार के दिन स्नानादि से निवृत होने के बाद लाल वस्त्र धारण करके हनुमान जी की पूजा-अर्चना करें।
- मंगलवार के दिन लाल रंग के कपड़े पहनकर हनुमान जी की पूजा के बाद उन्हें सिंदूर अर्पित करें।
- मंगल दोष के दुष्प्रभावों से राहत के लिए मंगल ग्रह शांति पूजा करें।
- जातक के लिए गुड़, लाल मिर्च, शहद, लाल रंग के कपड़े, मसूर की दाल, लाल रंग की मिठाई आदि का दान करना श्रेष्ठ रहता है। .
आइए अब बात करते हैं कुंडली में मज़बूत मंगल के संकेतों की।
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मनुष्य जीवन पर मंगल का शुभ प्रभाव
जिन जातकों की कुंडली में मंगल की स्थिति मज़बूत होती है, वह अपने जीवन में साहसी और बहादुर होते हैं। यह लोग किसी भी तरह का जोख़िम उठाने से डरते नहीं हैं। शुभ मंगल वाले जातक बेहद दृढ़ निश्चयी होते हैं और जो एक बार ठान लेते हैं, वह करके रहते हैं। यह जातक जल्दी उत्साहित नहीं होते हैं और जीवन में जब तक अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते हैं, तब तक रुकते नहीं हैं और आगे बढ़ते रहते हैं।
ऐसे लोग जिनकी कुंडली में मंगल की स्थिति शुभ होती है, वह काफ़ी ऊर्जावान और भावुक होते हैं। हर काम को बढ़-चढ़कर करना पसंद होता है। इन लोगों में आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा होता है इसलिए यह अपने मन की बात निडरता से कह देते हैं। साथ ही, यह जातक अपने हक़ के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करने से भी पीछे नहीं रहते हैं। इन जातकों को खुद को और दूसरों को चुनौती देने में रुचि रखते हैं।
मंगल का कर्क राशि में गोचर के दौरान करें ये 3 अचूक उपाय
लाल रंग: मंगल ग्रह का संबंध लाल रंग से है इसलिए मंगल देव को शांत करने के लिए अपने दैनिक जीवन में लाल रंग का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। ऐसे में, आप लाल रंग के कपड़े धारण करें या फिर घर में लाल रंग की वस्तुएं रखें।
तांबा: मंगल ग्रह की धातु तांबा मानी जाती है। ऐसे में, इस धातु को धारण करने से आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और समस्याओं का सामना आप डटकर करते हैं। आप अपनी इच्छा अनुसार तांबे का कड़ा या फिर ब्रेसलेट पहन सकते हैं। साथ ही, मंगलवार के दिन तांबे की वस्तुओं का दान भी कर सकते हैं।
जौ: मंगल देव का अनाज जौ को माना गया है। इसका सेवन करने से शरीर को ताकत मिलती है। ज्योतिष की मानें तो, अमावस्या या पूर्णिमा के दिन जौ का आटा हवन में अर्पित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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मंगल का कर्क राशि में गोचर: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए मंगल आपकी कुंडली में लग्न या राशि के स्वामी होने के… (विस्तार से पढ़ें)
वृषभ राशि
वृषभ राशि वालों के लिए मंगल ग्रह आपकी कुंडली में सातवें भाव और द्वादश भाव… (विस्तार से पढ़ें)
मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों के लिए मंगल ग्रह आपकी कुंडली में छठे तथा ग्यारहवें भाव के… (विस्तार से पढ़ें)
कर्क राशि
कर्क राशि वालों के लिए मंगल देव आपकी कुंडली में पांचवें तथा दसवें भाव के… (विस्तार से पढ़ें)
सिंह राशि
सिंह राशि वालों के लिए मंगल ग्रह आपकी कुंडली में चौथे तथा भाग्य भाव के स्वामी… (विस्तार से पढ़ें)
कन्या राशि
कन्या राशि वालों के लिए मंगल आपकी कुंडली में तीसरे तथा आठवें भाव… (विस्तार से पढ़ें)
तुला राशि
तुला राशि वालों के लिए मंगल आपकी कुंडली में दूसरे तथा सातवें भाव… (विस्तार से पढ़ें)
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगल आपकी कुंडली में लग्न भाव और छठे भाव की… (विस्तार से पढ़ें)
धनु राशि
धनु राशि वालों के लिए मंगल आपकी कुंडली में पांचवें तथा द्वादश भाव के … (विस्तार से पढ़ें)
मकर राशि
मकर राशि वालों के लिए मंगल आपकी कुंडली में चौथे तथा लाभ भाव… (विस्तार से पढ़ें)
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के लिए मंगल आपकी कुंडली में तीसरे तथा दसवें भाव के… (विस्तार से पढ़ें)
मीन राशि
मीन राशि वालों के लिए मंगल आपकी कुंडली में दूसरे तथा भाग्य भाव के स्वामी… (विस्तार से पढ़ें)
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नहीं, कर्क राशि मंगल ग्रह की नीच राशि है इसलिए इस राशि में मंगल देव कमज़ोर अवस्था में होते हैं।
मंगल महाराज मकर राशि में उच्च होते हैं।
कर्क राशि में मंगल देव 03 अप्रैल 2025 को गोचर कर जाएंगे।