अप्रैल 2025: एस्ट्रोसेज एआई हर बार की तरह अपने पाठकों के लिए इस बार भी अप्रैल 2025 का यह विशेष ब्लॉग लेकर हाज़िर हैं। इस लेख में आपको अप्रैल माह से जुड़ी सभी जानकारी विस्तारपूर्वक प्राप्त होगी। हालांकि, अब हम मार्च को अलविदा कहते हुए अप्रैल में प्रवेश के लिए पूरी तरह से तैयार हैं जो कि ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, साल का चौथा महीना होता है। अप्रैल महीने की शुरुआत दर्शाती है कि साल के पहले तीन महीने बीत चुके हैं और अब वर्ष की दूसरी तिमाही दस्तक देने जा रही है। अप्रैल 2025 में धीरे-धीरे गर्मी अपना प्रचंड रूप धारण करने लगती है, लेकिन इस माह में कई बड़े पर्वों और व्रतों को भी मनाया जाता है जिससे इस माह का महत्व बढ़ जाता है इसलिए आप यह जानने के लिए उत्सुक होंगे कि आने वाला महीना हमारे लिए कौन सी सौगात लेकर आएगा।
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सिर्फ़ इतना ही नहीं, अप्रैल 2025 में कब और कौन से व्रत एवं त्योहार मनाए जाएंगे? कौन सा ग्रह कब अपनी राशि या दशा में बदलाव करेगा? क्या अप्रैल में कोई ग्रहण लगेगा? शेयर बाज़ार में निवेश करना कैसा रहेगा? इन सभी सवालों के जवाब आपको इस लेख में प्राप्त होंगे। साथ ही, आपको यह भी बताएंगे कि वर्ष 2025 का चौथा महीना अप्रैल सभी 12 राशियों के करियर, व्यापार एवं प्रेम जीवन के लिए कैसा रहेगा। तो आइए बिना देर किए शुरुआत करते हैं इस लेख की और सबसे पहले बात करते हैं अप्रैल माह के पंचांग की।
अप्रैल 2025 का ज्योतिषीय तथ्य और हिंदू पंचांग की गणना
आगे बढ़ने से पहले हम जान लेते हैं अप्रैल 2025 का पंचांग, इस महीने का आगाज़ भरणी नक्षत्र के तहत शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि अर्थात 01 अप्रैल 2025 को होगा जबकि इस महीने की समाप्ति मृगशिरा नक्षत्र के अंतर्गत शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी कि 30 अप्रैल 2025 को हो जाएगी। इस माह के पंचांग से आपको रूबरू करवाने के बाद हम अप्रैल महीने के तीज-त्योहारों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
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अप्रैल 2025 में पड़ने वाले व्रत एवं त्योहार की तिथियां
जैसे कि यह बात हम आपको बताते आये हैं कि हर माह अपने आप में ख़ास होता है और उस माह में मनाये जाने वाले व्रत-त्योहार इसे और ख़ास बना देते हैं। इसी प्रकार, अप्रैल में राम नवमी, हनुमान जयंती जैसे कई बड़े पर्व मनाए जाएंगे। इस माह में आने वाले हर व्रत-त्योहार को आप यादगार बना सकें इसलिए हम आपको अप्रैल 2025 में पड़ने वाले व्रत और पर्वों की पूरी सूची नीचे दे रहे हैं। तो आइए अब आगे बढ़ते हैं और नज़र डालते हैं इस माह के व्रत-त्योहारों पर।
तिथि | दिन | पर्व व व्रत |
06 अप्रैल 2025 | रविवार | रामनवमी |
07 अप्रैल 2025 | सोमवार | चैत्र नवरात्रि पारणा |
08 अप्रैल 2025 | मंगलवार | कामदा एकादशी |
10 अप्रैल 2025 | गुरुवार | प्रदोष व्रत (शुक्ल) |
12 अप्रैल 2025 | शनिवार | हनुमान जयंती |
12 अप्रैल 2025 | शनिवार | चैत्र पूर्णिमा व्रत |
14 अप्रैल 2025 | सोमवार | मेष संक्रांति |
16 अप्रैल 2025 | बुधवार | संकष्टी चतुर्थी |
24 अप्रैल 2025 | गुरुवार | वरुथिनी एकादशी |
25 अप्रैल 2025 | शुक्रवार | प्रदोष व्रत (कृष्ण) |
26 अप्रैल 2025 | शनिवार | मासिक शिवरात्रि |
27 अप्रैल 2025 | रविवार | वैशाख अमावस्या |
30 अप्रैल 2025 | बुधवार | अक्षय तृतीया |
अप्रैल 2025 के बैंक अवकाशों की सम्पूर्ण सूची
अप्रैल 2025 में कब और किस दिन रहेंगे बैंक बंद? इसकी जानकारी भी हम आपको प्रदान कर रहे हैं जो कि इस प्रकार हैं:
तिथि | दिन | अवकाश | राज्य |
01 अप्रैल 2025 | मंगलवार | सरहुली | झारखंड |
01 अप्रैल 2025 | मंगलवार | उड़ीसा दिवस | उड़ीसा |
01 अप्रैल 2025 | मंगलवार | ईद-उल-फ़ितर | तेलंगाना |
05 अप्रैल 2025 | शनिवार | बाबू जगजीवन राम जयंती | आंध्र प्रदेश, तेलंगाना |
06 अप्रैल 2025 | रविवार | रामनवमी | इन राज्यों के अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप,, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पांडिचेरी, तमिलनाडु, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल पूरे देश में राष्ट्रीय दिवस |
10 अप्रैल 2025 | गुरुवार | महावीर जयंती | चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब , राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, लक्षद्वीप, |
13 अप्रैल 2025 | रविवार | बैसाखी | हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, पंजाब |
13 अप्रैल 2025 | रविवार | महा विशुबा संक्रांति | उड़ीसा |
14 अप्रैल 2025 | सोमवार | बोहाग बिहू अवकाश | त्रिपुरा |
14 अप्रैल 2025 | सोमवार | डॉ अंबेडकर जयंती | अंडमान और निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, असम, चंडीगढ़, दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली, दिल्ली, लक्षद्वीप,, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा आदि राज्यों के अलावा राष्ट्रीय अवकाश |
14 अप्रैल 2025 | सोमवार | तमिल नव वर्ष | तमिलनाडु |
14 अप्रैल 2025 | सोमवार | विषु | केरल |
14 अप्रैल 2025 | सोमवार | बोहाग बिहू | असम |
14 अप्रैल 2025 | सोमवार | बंगाली नव वर्ष | त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल |
14 अप्रैल 2025 | सोमवार | चीराओबा | मणिपुर |
15 अप्रैल 2025 | मंगलवार | बोहाग बिहू | अरुणाचल प्रदेश |
15 अप्रैल 2025 | मंगलवार | हिमाचल प्रदेश स्थापना दिवस | हिमाचल प्रदेश |
16 अप्रैल 2025 | रविवार | बोहाग बिहू | असम |
18 अप्रैल 2025 | शुक्रवार | गुड फ्राइडे | हरियाणा और झारखंड के अलावा राष्ट्रीय अवकाश |
19 अप्रैल 2025 | शनिवार | ईस्टर सैटरडे | नागालैंड |
20 अप्रैल 2025 | रविवार | ईस्टर संडे | केरल, नागालैंड |
21 अप्रैल 2025 | सोमवार | गरिया पूजा | त्रिपुरा |
29 अप्रैल 2025 | मंगलवार | महर्षि परशुराम जयंती | गुजरात, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब और राजस्थान |
30 अप्रैल 2025 | बुधवार | बसवा जयंती | कर्नाटक |
अप्रैल 2025 में अन्नप्राशन संस्कार के शुभ मुहूर्त
जो माता-पिता अपनी संतान का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न करने की सोच रहे हैं, लेकिन कोई शुभ मुहूर्त नहीं मिल रहा है, तो यहां हम आपको अप्रैल 2025 के लिए अन्नप्राशन संस्कार के शुभ मुहूर्त प्रदान कर रहे हैं।
तिथि | मुहूर्त |
2 अप्रैल 2025 | 13:02-19:56 |
10 अप्रैल 2025 | 14:51-17:0919:25-25:30 |
14 अप्रैल 2025 | 10:01-12:1514:36-21:29 |
25 अप्रैल 2025 | 16:10-22:39 |
30 अप्रैल 2025 | 07:02-08:5811:12-15:50 |
अप्रैल 2025 में मुंडन संस्कार के लिए शुभ मुहूर्त
तिथि | दिन | मुहूर्त |
14 अप्रैल 2025 | सोमवार | 08:27:45-24:13:56 |
17 अप्रैल 2025 | गुरुवार | 15:26:27-29:54:14 |
23 अप्रैल 2025 | बुधवार | 05:48:11-29:48:11 |
24 अप्रैल 2025 | गुरुवार, | 05:47:1-10:50:29 |
अप्रैल में कर्णवेध संस्कार के लिए शुभ मुहूर्त
अप्रैल में आप कब और किस समय कर सकते हैं अपनी संतान का कर्णवेध संस्कार, आइए जानते हैं।
तिथि | मुहूर्त |
03 अप्रैल, 2025 | 07:32-10:4412:58-18:28 |
05 अप्रैल, 2025 | 08:40-12:5115:11-19:45 |
13 अप्रैल, 2025 | 07:02-12:19,14:40-19:13 |
21 अप्रैल, 2025 | 14:08-18:42 |
26 अप्रैल, 2025 | 07:18-09:13 |
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अप्रैल माह के ग्रहण और गोचर
ज्योतिष की नज़रों में अप्रैल 2025 को ख़ास कहा जाएगा क्योंकि इस माह में हर माह की तरह कई ग्रह अपनी चाल, दशा और राशि में परिवर्तन करेंगे। तो आइए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि अप्रैल 2025 में कब और कौन सा ग्रह गोचर और स्थिति में बदलाव करेगा।
मंगल का कर्क राशि में गोचर (03 अप्रैल 2025): साहस, शौर्य एवं पराक्रम के कारक ग्रह मंगल हैं जो अब 03 अप्रैल 2025 की देर रात 01 बजकर 32 मिनट पर अपनी नीच राशि कर्क में गोचर करने जा रहे हैं।
बुध मीन राशि में मार्गी (07 अप्रैल 2025): बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्क और व्यापार के कारक कहा जाता है और अब यह 07 अप्रैल 2025 की शाम 04 बजकर 04 मिनट पर मीन राशि में मार्गी हो जाएंगे।
शुक्र मीन राशि में मार्गी (13 अप्रैल 2025): प्रेम और ऐश्वर्य के ग्रह शुक्र 13 अप्रैल 2025 की सुबह 05 बजकर 45 मिनट पर मार्गी होने जा रहे हैं जो कि इनकी उच्च राशि है।
सूर्य का मेष राशि में गोचर (14 अप्रैल 2025): नवग्रहों के राजा के नाम से प्रसिद्ध सूर्य देव अपनी राशि में बदलाव करते हुए मंगल ग्रह की मेष राशि में 14 अप्रैल 2025 की देर रात 03 बजे गोचर करने जा रहे हैं।
अप्रैल 2025 में पड़ने वाले व्रत-त्योहार का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में प्रत्येक व्रत और पर्व का अपना महत्व है जो उसे दूसरों पर्वों से अलग बनाते हैं। आपको अप्रैल माह के व्रत-त्योहार की तिथियों से अवगत करवाने के बाद अब हम आपको इन त्योहारों का धार्मिक महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं।
रामनवमी (6 अप्रैल 2025, रविवार): हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है रामनवमी और इसे भारत सहित दुनियाभर में पूरी भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है। रामनवमी का दिन भगवान विष्णु के सातवें अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। यह तिथि राम जी के भक्तों के लिए बहुत ख़ास होती है।
चैत्र नवरात्रि पारणा (7 अप्रैल, 2025 सोमवार): चैत्र नवरात्रि देवी शक्ति को समर्पित शक्तिशाली 9 दिन होते हैं। इन नौ दिनों तक की जाने वाली माता दुर्गा की पूजा और व्रत का पारणा चैत्र शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को किया जाता है। पारणा के साथ चैत्र नवरात्रि का समापन हो जाता है।
कामदा एकादशी (08 अप्रैल 2025 मंगलवार): कामदा एकादशी व्रत प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। कामदा एकादशी पर भगवान वासुदेव और श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। कहते हैं कि कामदा एकादशी व्रत को करने से जातक की सभी मनोकामनाओं पूर्ण होती हैं।
प्रदोष व्रत (शुक्ल) (10 अप्रैल 2025, गुरुवार): सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को विशेष स्थान प्राप्त है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत करने किया जाता है। इस व्रत में महादेव और देवी पार्वती की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, प्रदोष व्रत को सच्चे हृदय से करने पर शिव जी अपने सभी भक्तों के मनोरथ पूर्ण करते हैं।
हनुमान जयंती (12 अप्रैल, 2025, शनिवार): संकटमोचन हनुमान को भगवान राम का परम भक्त कहा जाता है और इन्हीं के जन्मोत्सव के रूप में हनुमान जयंती को मनाया जाता है। इस पर्व को पूरे भारत में बहुत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ भक्तजन मनाते हैं। पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि के दिन साहस और शक्ति के प्रतीक माने जाने वाले हनुमान जी का जन्म हुआ था।
चैत्र पूर्णिमा (12 अप्रैल 2025, शनिवार): बता दें कि चैत्र माह में आने वाली पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस पूर्णिमा को कुछ लोग चैती पूनम भी कहते हैं। हिंदू धर्म में चैत्र पूर्णिमा व्रत को पुण्यकारी माना गया है और इस दिन भगवान सत्यनारायण की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। चैत्र पूर्णिमा व्रत करने से भक्त को जीवन में सभी तरह की सुख-समृद्धि के साथ-साथ मनोवांछित फल की प्राप्ति होती हैं।
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मेष संक्रांति (14 अप्रैल 2025, सोमवार): सूर्य देव के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने को संक्रांति कहा जाता है। सनातन धर्म में हर महीने आने वाली संक्रांति तिथि को पुण्यदायी और लाभकारी माना जाता है क्योंकि सूर्य का गोचर हर माह होता है। जब सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे मेष संक्रांति के नाम से जाना जाता है। हालांकि, यह तिथि दान-पुण्य और शुभ कार्य के लिए श्रेष्ठ होती है।
संकष्टी चतुर्थी (16 अप्रैल 2025, बुधवार): संकष्टी चतुर्थी का अर्थ होता है संकट हरने वाली चतुर्थी। यह व्रत प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश को समर्पित होता है और इस दिन बप्पा की पूजा भक्त सच्चे मन से विधिपूर्वक करते हैं। कहते हैं कि संकष्टी चतुर्थी व्रत करने से भक्त के जीवन से सभी दुख और कष्ट दूर होते हैं।
वरुथिनी एकादशी (24 अप्रैल 2025, गुरुवार): सामान्य रूप से, वरुथिनी एकादशी का व्रत अप्रैल और मई के महीने में किया जाता जो कि जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि वरुथिनी एकादशी व्रत से भक्त के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
मासिक शिवरात्रि (26 अप्रैल 2025, शनिवार): मासिक शिवरात्रि व्रत भगवान शिव के भक्तों के लिए विशेष होता है जो कि हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। शिव जी की कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए भक्तजन शिवरात्रि का व्रत करते हैं।
वैशाख अमावस्या (27 अप्रैल 2025, रविवार): हिंदू वर्ष के दूसरे माह वैशाख में आने वाली अमावस्या को वैशाख अमावस्या के नाम से जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, वैशाख माह में त्रेता युग की शुरुआत हुई थी और इस दिन को दक्षिण भारत में शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है।
अक्षय तृतीया (30 अप्रैल 2025, बुधवार): अक्षय तृतीया को बहुत शुभ और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है जो कि हर माह वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। यह तिथि अखा तीज के नाम से भी जानी जाती हैं। अक्षय तृतीया को सोना खरीदने के साथ-साथ दान-पुण्य, स्नान, यज्ञ, आदि कार्यों के लिए भी शुभ माना जाता है।
ज्योतिषीय एवं धार्मिक दृष्टि से अप्रैल 2025
अप्रैल का महीना न सिर्फ धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है, बल्कि देश के लिए भी अप्रैल बेहद ख़ास होता है क्योंकि इस महीने से ही नया फाइनेंशियल ईयर शुरू होता है। सामान्य शब्दों में कहें तो, देश के एक नए आर्थिक वर्ष का आरंभ होता है। धार्मिक रूप से अप्रैल में जहां राम नवमी, हनुमान जयंती, महाष्टमी जैसे पर्वों को मनाया जाएगा। दूसरी तरफ, ज्योतिष के अनुसार, अप्रैल 2025 में कई बड़े ग्रहों के गोचर होने जा रहे हैं। वहीं, धार्मिक रूप से अप्रैल का माह विशेष होता है क्योंकि अधिकतर इस महीने में ही चैत्र माह का आगमन होता है।
बात करें अप्रैल 2025 के पंचांग की, तो हिन्दू धर्म के अनुसार अप्रैल माह की शुरुआत चैत्र माह से होगी जबकि इसका समापन वैशाख माह के अंतर्गत होगा। हालांकि, चैत्र माह का आगाज़ 15 मार्च 2025 हो गया है जो 12 अप्रैल 2025 को समाप्त हो जाएगा। इसके बाद, हिन्दू वर्ष का दूसरा महीना वैशाख 13 अप्रैल 2025 को शुरू होकर 12 मई 2025 तक रहेगा। विक्रम संवत के अनुसार, हिन्दू नववर्ष चैत्र से शुरू होता है और इसको ही संवत्सर कहा जाता है।
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शायद ही आप जानते होंगे कि चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नया विक्रम संवत शुरू हो जाता है। वर्ष 2025 में नया विक्रम संवत 2082 लगेगा। चैत्र माह पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ होता है इसलिए इस मास के दौरान देवी-देवताओं का आशीर्वाद पाने के लिए अनेक व्रत किए जाते हैं। कहते हैं कि चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा तिथि से ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इस दिन ही विष्णु जी पहला मत्स्य अवतार लेकर धरती को प्रलय से बचाने के लिए प्रकट हुए थे। कहते हैं कि चैत्र महीने से ही सतयुग का आरंभ हुआ था। इस माह में ही राजा राम का राज्यभिषेक हुआ था इसलिए चैत्र माह का महत्व बढ़ जाता है।
इसी क्रम में, चैत्र माह के बाद वैशाख माह लग जाएगा जो कि हिंदू नव वर्ष का दूसरा महीना होता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, वैशाख हर साल सामान्य तौर पर अप्रैल या मई में आता है। वैशाख महीने का संबंध विशाखा नक्षत्र से माना गया है और यह नक्षत्र व्यक्ति को जीवन में धन-संपदा पाने और पुण्य कर्मों में वृद्धि के अवसर प्रदान करता है। वैशाख मास में श्रीहरि विष्णु और भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना करना कल्याणकारी माना गया है। इस महीने में ही एक बार भक्तों को अपने आराध्य बांके बिहारी जी के चरणों के दर्शन होते हैं।
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अप्रैल मासिक भविष्यवाणी 2025: 12 राशियों का राशिफल
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अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, यह महीना मेष राशि के जातकों के लिए मध्यम रूप से……(विस्तार से पढ़ें)
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अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, यह महीना वृषभ राशि के जातकों के लिए अनुकूल……(विस्तार से पढ़ें)
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कन्या राशि में जन्मे जातकों के लिए यह महीना मध्यम रूप से फलदायी रहने की संभावना है। आपकी…(विस्तार से पढ़ें)
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वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह महीना कुछ हद तक अनुकूल रहने की संभावना है। लेकिन,…(विस्तार से पढ़ें)
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अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, यह महीना धनु राशि के जातकों के लिए औसत रूप…(विस्तार से पढ़ें)
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अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, यह महीना मकर राशि में जन्म लेने वाले जातकों के लिए…(विस्तार से पढ़ें)
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कुंभ राशि में जन्मे जातकों के लिए यह महीना आर्थिक मामलों के लिए बहुत ज्यादा अनुकूल रहने की…(विस्तार से पढ़ें)
मीन राशि
अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, यह महीना मीन राशि के जातकों के लिए उतार-चढ़ाव से…(विस्तार से पढ़ें)
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वर्ष 2025 में रामनवमी का पर्व 06 अप्रैल 2025 का है।
इस महीने बुध मीन राशि में मार्गी 07 अप्रैल 2025 को हो रहे हैं।
वर्ष 2025 के अप्रैल माह में संकष्टी चतुर्थी का व्रत 16 अप्रैल 2025 को किया जाएगा।